CBSE Hindi Class 9 Chapter 10 भारति जयविजय करे NCERT Solutions - FREE PDF Download
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NCERT Solutions for Class 9 Ganga Chapter 10 Bharati Jai Vijay Kare
अभ्यास (पृष्ठ 168-174)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1. “भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से-
(क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है।
(ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है।
(ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
(घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है।
उत्तर: (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
तर्क – कविता में भारत की प्राकृतिक सुंदरता, हरी-भरी वनस्पतियों, सोने के समान फसलों, हिमालय, गंगा और आध्यात्मिक ज्ञान-परंपरा का गौरवपूर्ण वर्णन किया गया है। इसलिए कविता केवल भारत की भौगोलिक बनावट नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, प्रकृति और समृद्धि की भी प्रशंसा करती है।
प्रश्न 2. “कनक- शस्य- कमल धरे” पंक्ति का भावार्थ है-
(क) भारत की धन-धान्य संपन्नता
(ख) भारत की नदियों का सौंदर्य
(ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता
(घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास
उत्तर: (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता।
तर्क – ‘कनक’ का अर्थ सोना और ‘शस्य’ का अर्थ फसल है। कवि ने भारत की लहलहाती हुई सुनहरी फसलों की तुलना कमल से की है। यह पंक्ति भारत की उपजाऊ धरती, कृषि-संपन्नता और धन-धान्य से परिपूर्ण स्वरूप को व्यक्त करती है।
प्रश्न 3. समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं-
(क) गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले
(ख) गर्जितोर्मि सागर-जल / धोता शुचि चरण युगल
(ग) भारति, जय, विजयकरे / कनक शस्य कमलधरे!
(घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख- शतरव- -मुखरे!
उत्तर: (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे!
तर्क – इन पंक्तियों में भारत के ज्ञान, संस्कृति और अनेक स्वरों की गूँज को चारों दिशाओं में फैलता हुआ दिखाया गया है। भारत के विविध विचार, भाषाएँ और सांस्कृतिक परंपराएँ पूरे विश्व को प्रभावित करती हैं। इसलिए ये पंक्तियाँ विश्व में भारत के महत्त्व का उद्घोष करती हैं।
प्रश्न 4. कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?
(क) सरल, बोल-चाल की भाषा
(ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त
(ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण
(घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक
उत्तर: (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।
तर्क – कविता में ‘कनक-शस्य-कमलधरे’, ‘ज्योतिर्जल-कण’, ‘तरु-तृण-वन-लता-वसन’ और ‘मुकुट शुभ्र हिम-तुषार’ जैसे संस्कृतनिष्ठ तथा सामासिक पदों का प्रयोग किया गया है। ये शब्द कविता की भाषा को प्रभावशाली, गंभीर और गौरवपूर्ण बनाते हैं।
प्रश्न 5. भारत के वस्त्रों में ‘तरु-तृण-वन-लता’ और गले में ‘गंगा-धारा’ को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?
(क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक
(ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम
(ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक
(घ) सामाजिक और राजनीतिक
उत्तर: (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक।
तर्क – कवि ने पेड़-पौधों, घास, वन, लताओं और गंगा को भारतमाता के वस्त्र तथा आभूषण के रूप में प्रस्तुत किया है। इससे प्रकृति के प्रति सम्मान, उसके संरक्षण की आवश्यकता और भारतीय संस्कृति में नदियों तथा वनों के महत्त्व का संदेश मिलता है।
अर्थ और भाव
नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) “लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल!”
उत्तर: अर्थ – भारतमाता के चरणों के समीप स्थित लंका सौ पंखुड़ियों वाले कमल के समान दिखाई देती है। गरजती हुई समुद्री लहरें भारतमाता के दोनों पवित्र चरणों को निरंतर धो रही हैं।
भाव – कवि ने भारत के भौगोलिक स्वरूप का देवी के रूप में मानवीकरण किया है। दक्षिण में स्थित लंका को भारतमाता के चरणों के पास खिले हुए कमल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। समुद्र की ऊँची और गर्जना करती लहरें मानो श्रद्धापूर्वक उनके चरणों को पखार रही हैं। इन पंक्तियों से भारत के प्राकृतिक सौंदर्य, पवित्रता और भव्यता का चित्र सामने आता है।
(ख) “प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!”
उत्तर: अर्थ – भारतमाता के प्राणों में पवित्र ‘ओंकार’ की ध्वनि समाई हुई है। उसकी उदार दिशाएँ सैकड़ों मुखों और सैकड़ों स्वरों से गूँज रही हैं।
भाव – कवि भारत को केवल भूमि का एक भाग नहीं, बल्कि जीवंत और आध्यात्मिक चेतना से संपन्न राष्ट्र मानता है। ‘ओंकार’ भारत की प्राचीन ज्ञान और अध्यात्म-परंपरा का प्रतीक है। ‘शतमुख’ और ‘शतरव’ भारत की अनेक भाषाओं, संस्कृतियों, विचारों और परंपराओं की ओर संकेत करते हैं। अलग-अलग स्वर होने के बावजूद ये सभी मिलकर भारत की एकता और महानता का संदेश देते हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1. कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?
उत्तर: इस कविता में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की गहरी देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और भारत के प्रति श्रद्धा की भावना व्यक्त हुई है। कवि भारतभूमि को एक पवित्र, सुंदर और शक्तिशाली देवी के रूप में प्रस्तुत करता है।
कवि को भारत की प्राकृतिक संपदा, कृषि-संपन्नता, हिमालय, गंगा, समुद्र, वनस्पतियों और ज्ञान-परंपरा पर गर्व है। वह भारत की विजय और समृद्धि की कामना करता है। कविता में देश की प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रति प्रेम तथा सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
प्रश्न 2. कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?
उत्तर: कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य को भारतमाता के दिव्य रूप के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। हिमालय को भारतमाता का बर्फ से ढका हुआ मुकुट, गंगा की स्वच्छ धारा को गले का हार और पेड़-पौधों, घास, वनों तथा लताओं को उनके वस्त्र के रूप में दिखाया गया है। समुद्र की गर्जना करती लहरें उनके पवित्र चरणों को धोती हैं और सुनहरी फसलें उनके हाथों में खिले कमल के समान दिखाई देती हैं।
हाँ, प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का महत्त्वपूर्ण रूप है। देश केवल उसकी सीमाओं से नहीं बनता, बल्कि उसकी नदियाँ, पर्वत, वन, भूमि, जल और जीव-जंतु भी उसका अभिन्न भाग होते हैं। नदियों को प्रदूषण से बचाना, पेड़ लगाना, जल की बचत करना और प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करना वास्तव में राष्ट्र की संपदा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा करना है।
प्रश्न 3. “कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?
उत्तर: “कनक-शस्य-कमलधरे” पंक्ति भारत की उपजाऊ भूमि, कृषि-प्रधान स्वरूप और धन-धान्य की संपन्नता की ओर संकेत करती है। ‘कनक’ का अर्थ सोना, ‘शस्य’ का अर्थ फसल और ‘कमलधरे’ का अर्थ कमल धारण करने वाली है।
भारत के खेतों में पकने वाली सुनहरी फसलें दूर से सोने के समान चमकती हैं। कवि ने इन फसलों को भारतमाता के हाथों में धारण किए हुए कमल के रूप में प्रस्तुत किया है। यह पंक्ति किसानों के परिश्रम, धरती की उर्वरता, कृषि की समृद्धि और देश की आर्थिक संपन्नता को व्यक्त करती है।
प्रश्न 4. “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?
उत्तर: हिमालय भारत के उत्तर में विशाल और ऊँची पर्वत-श्रृंखला के रूप में स्थित है। मानचित्र में उसका स्थान भारतमाता के मस्तक के समान दिखाई देता है। उसकी चोटियाँ वर्षभर सफेद बर्फ से ढकी रहती हैं, इसलिए कवि ने उसे भारतमाता का स्वच्छ, उज्ज्वल और सुंदर मुकुट कहा है।
हिमालय भारत की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ देश की रक्षा भी करता है। वह ठंडी हवाओं को रोकता है, अनेक नदियों का स्रोत है और जलवायु को प्रभावित करता है। उसकी ऊँचाई भारत की महानता, दृढ़ता और गौरव का प्रतीक है। इसी कारण कवि ने हिमालय को भारतमाता के शुभ्र हिम-मुकुट के रूप में चित्रित किया है।
विधा से संवाद
कविता का सौंदर्य
नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए-
“भारति, जय, विजयकरे!
कनक- शस्य- कमलधरे!”
इन पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि का मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है। इस कविता की कुछ अन्य विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए-
उत्तर:
1. प्रकृति का मानवीकरण
कविता की पंक्तियाँ –
“गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल!”
स्पष्टीकरण – इन पंक्तियों में समुद्र को एक मनुष्य की तरह भारतमाता के चरण धोते हुए दिखाया गया है। निर्जीव प्रकृति को मानवीय क्रिया करते हुए प्रस्तुत करने के कारण यहाँ मानवीकरण अलंकार है।
2. आलंकारिक प्रयोग
कविता की पंक्ति –
“अंचल में खचित सुमन”
स्पष्टीकरण – भारत की धरती पर खिले हुए फूलों को भारतमाता के आँचल में जड़े हुए सुंदर रत्नों अथवा फूलों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे भारतमाता का आकर्षक और चित्रात्मक स्वरूप सामने आता है।
3. समस्त पद / सामासिक पद का प्रयोग
कविता की पंक्तियाँ –
“कनक-शस्य-कमलधरे!”
“तरु-तृण-वन-लता-वसन”
स्पष्टीकरण – इन पंक्तियों में अनेक शब्दों को जोड़कर सामासिक पद बनाए गए हैं। इन पदों के कारण कम शब्दों में विस्तृत भाव प्रस्तुत हुआ है।
4. संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग
कविता की पंक्तियाँ –
“मुकुट शुभ्र हिम-तुषार”
“प्राण प्रणव ओंकार”
स्पष्टीकरण – ‘शुभ्र’, ‘तुषार’, ‘प्रणव’ और ‘ओंकार’ जैसे संस्कृत के तत्सम शब्द कविता की भाषा को गंभीर, प्रभावशाली और गौरवपूर्ण बनाते हैं।
विषयों से संवाद
प्रश्न 1. स्वतंत्रता – पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक / परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?
उत्तर: वर्तमान समय में भारत को नए रूप में प्रस्तुत करते हुए मैं उसकी प्राचीन संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक उपलब्धियों और विविधताओं को भी शामिल करूँगा।
तकनीकी प्रगति – भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संचार के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण प्रगति की है। भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ विश्वभर में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
अंतरिक्ष अनुसंधान – भारत ने अंतरिक्ष अभियानों, उपग्रहों और वैज्ञानिक अनुसंधान में विशेष पहचान बनाई है। ये उपलब्धियाँ देश की वैज्ञानिक क्षमता को दर्शाती हैं।
युवा शक्ति – भारत की बड़ी युवा आबादी नए विचारों, उद्यमों, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से देश के विकास में योगदान दे रही है।
कृषि और ग्रामीण जीवन – आधुनिक तकनीक के प्रयोग के साथ भारत की कृषि-परंपरा आज भी देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का प्रमुख आधार है।
भाषाई और सांस्कृतिक विविधता – भारत में अनेक भाषाएँ, लोककलाएँ, पहनावे, व्यंजन, नृत्य, संगीत और त्योहार पाए जाते हैं। इतनी विविधता के बाद भी सभी लोग भारतीयता के सूत्र में जुड़े हैं।
लोकतांत्रिक मूल्य – भारत का लोकतंत्र, संविधान, समानता, स्वतंत्रता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता उसकी आधुनिक पहचान का महत्त्वपूर्ण भाग है।
विश्व-बंधुत्व – ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साथ भारत विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण का संदेश देता है।
इस प्रकार आधुनिक भारत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान, लोकतंत्र, युवा शक्ति और विविधता का सुंदर संगम है।
प्रश्न 2. “शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करते हैं?
उत्तर: “शतमुख-शतरव-मुखरे” का अर्थ है अनेक मुखों से निकलने वाली अनेक प्रकार की ध्वनियाँ। यह पंक्ति भारत की भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में दीपावली, होली, ईद, क्रिसमस, गुरुपर्व, पोंगल, ओणम, बिहू, बैसाखी और दुर्गापूजा जैसे अनेक पर्व मनाए जाते हैं। इन त्योहारों को मनाने के तरीके, वेशभूषा, भोजन, संगीत और रीति-रिवाज अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इनमें प्रेम, भाईचारा, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक आनंद की भावना समान होती है।
अलग-अलग संस्कृतियों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में भाग लेते हैं और परंपराओं का सम्मान करते हैं। इस प्रकार अनेक स्वर मिलकर भारतीयता का एक सामूहिक स्वर बनाते हैं। यही विविधता में एकता ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करती है।
प्रश्न 3. भारत को सुदृढ़ करने में इसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के महत्व को बताते हुए संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर: भारत की सुदृढ़ता के आधार
भारत की शक्ति उसकी प्रकृति, संस्कृति और समृद्ध ज्ञान-परंपरा में निहित है। हिमालय, नदियाँ, वन, उपजाऊ मैदान और समुद्री तट देश को जल, भोजन, औषधियाँ, खनिज और अन्य आवश्यक संसाधन प्रदान करते हैं। प्रकृति भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और जनजीवन का आधार है।
भारत की संस्कृति विविधता में एकता, सहिष्णुता, सहयोग और मानवता का संदेश देती है। विभिन्न भाषाओं, धर्मों, त्योहारों और परंपराओं के बावजूद देश के लोग भारतीयता के सूत्र में जुड़े हुए हैं। यह सांस्कृतिक एकता समाज को स्थिर और मजबूत बनाती है।
भारत की ज्ञान-परंपरा में वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन और साहित्य का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। आधुनिक शिक्षा और विज्ञान के साथ इस प्राचीन ज्ञान का समन्वय देश को आगे बढ़ने की दिशा देता है।
प्रकृति का संरक्षण, संस्कृति का सम्मान और ज्ञान का विकास मिलकर भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और विश्व में सम्मानित राष्ट्र बनाते हैं।
प्रश्न 4. कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?
उत्तर: कविता में गंगा की स्वच्छ धारा को भारतमाता का उज्ज्वल हार और बर्फ से ढके हिमालय को उनका शुभ्र मुकुट कहा गया है। परंतु बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण इन दोनों का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
नदियों पर प्रभाव
औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज, प्लास्टिक, रासायनिक पदार्थ और धार्मिक कचरा नदियों में मिलने से उनका जल प्रदूषित हो रहा है। इससे जल की गुणवत्ता घटती है और मछलियों सहित अनेक जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ता है। प्रदूषित नदी का पानी मानव स्वास्थ्य और कृषि के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
हिमालय पर प्रभाव
वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण हिमालय के हिमनदों और बर्फ पर प्रभाव पड़ रहा है। ग्लेशियरों के पिघलने की गति बढ़ने से हिमनद झीलों, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और भविष्य में जल की उपलब्धता से जुड़ी चिंताएँ उत्पन्न हो रही हैं।
जलवायु में असंतुलन
अनियमित वर्षा, बादल फटना, अत्यधिक गर्मी और मौसम में अचानक परिवर्तन हिमालयी पारिस्थितिकी को प्रभावित करते हैं। इससे वनस्पतियों, जीव-जंतुओं और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन पर भी असर पड़ता है।
इन समस्याओं से बचने के लिए नदियों में कचरा डालने पर रोक, औद्योगिक अपशिष्ट का उचित उपचार, वनों का संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग और कार्बन उत्सर्जन में कमी आवश्यक है। गंगा और हिमालय की रक्षा करना भारत की प्राकृतिक विरासत तथा भविष्य की पीढ़ियों की रक्षा करना है।
विविध रंग भारत के
आप अपने कक्षा – समूह में मिलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता पर आधारित एक पावरपॉइंट प्रस्तुति / पोस्टर / चार्ट / कोलाज तैयार कीजिए और इसे अपनी कक्षा में दिखाइए। आप भारत के विभिन्न राज्यों पर केंद्रित पावरपॉइंट प्रस्तुति / पोस्टर / चार्ट / कोलाज भी बना सकते हैं।
उत्तर: इस गतिविधि के लिए विद्यार्थी छोटे-छोटे समूह बनाकर भारत की सांस्कृतिक विविधता पर आकर्षक पावरपॉइंट प्रस्तुति, पोस्टर, चार्ट अथवा कोलाज तैयार कर सकते हैं। इसमें निम्नलिखित विषयों को सम्मिलित किया जा सकता है—
पोशाक – विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा, जैसे पंजाब का कुर्ता-पायजामा और फुलकारी, राजस्थान की घाघरा-चोली और पगड़ी, तमिलनाडु की वेष्टी तथा असम की मेखला-चादर।
नृत्य – कथक, भरतनाट्यम, भांगड़ा, बिहू, गरबा, कथकली और ओडिसी जैसे शास्त्रीय तथा लोकनृत्यों के चित्र।
खान-पान – राजस्थान की दाल-बाटी, दक्षिण भारत का डोसा, पंजाब का सरसों का साग, गुजरात का ढोकला, बंगाल की मिठाइयाँ और बिहार का लिट्टी-चोखा।
भाषाएँ – भारत की प्रमुख भाषाओं और उनकी लिपियों के उदाहरण प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
पर्व और उत्सव – दीपावली, ईद, क्रिसमस, गुरुपर्व, पोंगल, ओणम, बिहू और दुर्गापूजा जैसे त्योहारों का वर्णन।
वास्तुकला – दक्षिण भारत के मंदिर, राजस्थान के किले, उत्तर भारत के ऐतिहासिक स्मारक और पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक भवन।
कला और हस्तशिल्प – मधुबनी चित्रकला, वारली कला, चिकनकारी, बंधेज, कश्मीरी कढ़ाई और बाँस से बनी वस्तुएँ।
प्रस्तुति के अंत में यह संदेश लिखा जा सकता है—
“भाषाएँ अनेक, संस्कृतियाँ अनेक, पर हमारी पहचान एक—हम भारतीय हैं।”
सृजन
प्रश्न 1. मान लीजिए, आपको भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करते हुए सुसज्जित करने का अवसर मिले तो आप अपने राज्य के किन सांस्कृतिक, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चिह्नों, पुष्पों आदि का प्रयोग कर उसकी साज-सज्जा करेंगे?
उत्तर: नोट – विद्यार्थी इस उत्तर को अपने राज्य की संस्कृति के अनुसार लिख सकते हैं। यहाँ उत्तर प्रदेश के संदर्भ में एक उदाहरण प्रस्तुत है।
यदि मुझे भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करके उत्तर प्रदेश की संस्कृति के अनुसार सजाने का अवसर मिले, तो मैं उसकी साज-सज्जा इस प्रकार करूँगा—
वेशभूषा – भारतमाता को लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी से सजा हुआ सफेद अथवा हल्के रंग का वस्त्र पहनाऊँगा। यह उत्तर प्रदेश की सुंदर कारीगरी और हस्तकला का प्रतीक होगा।
पगड़ी – उनके सिर पर बनारसी रेशम से बनी आकर्षक पगड़ी सजाऊँगा। यह वाराणसी की समृद्ध बुनाई-परंपरा को दर्शाएगी।
आभूषण – गंगा-जमुनी संस्कृति को प्रकट करने वाले पारंपरिक आभूषणों से उनका श्रृंगार करूँगा। ये विभिन्न संस्कृतियों के मेल और सामाजिक एकता के प्रतीक होंगे।
पुष्प – उनकी सजावट के लिए पलाश के चमकीले फूलों का प्रयोग करूँगा। ये प्राकृतिक सुंदरता, ऊर्जा और उत्साह का संदेश देंगे।
प्रतीक – उनके एक हाथ में ज्ञान की प्रतीक पुस्तक और दूसरे हाथ में गेहूँ की सुनहरी बालियाँ रखूँगा। पुस्तक उत्तर प्रदेश की साहित्यिक तथा शैक्षिक परंपरा को और फसलें इसकी कृषि-संपन्नता को दर्शाएँगी।
पृष्ठभूमि – पीछे गंगा नदी, सारनाथ का स्तंभ, ताजमहल, अयोध्या, काशी के घाट और हरे-भरे खेत बनाए जा सकते हैं।
इस प्रकार भारतमाता की सजावट में उत्तर प्रदेश की कला, ज्ञान, कृषि, साहित्य, अध्यात्म और सांस्कृतिक एकता का सुंदर चित्र प्रस्तुत होगा।
प्रश्न 2. भारत पर आधारित एक डाक टिकट, पोस्टर या पुस्तक के लिए आवरण पृष्ठ बनाइए और बताइए कि आप उसमें किन-किन प्रतीकों को सम्मिलित करेंगे और क्यों?
उत्तर:
मैं भारत पर आधारित पुस्तक के आवरण पृष्ठ का शीर्षक “अद्भुत भारत—एकता में विविधता” रखूँगा।
आवरण पृष्ठ में निम्नलिखित प्रतीकों को शामिल करूँगा—
भारत का मानचित्र – यह देश की भौगोलिक एकता और राष्ट्रीय पहचान को दर्शाएगा।
तिरंगा – यह साहस, शांति, समृद्धि और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक होगा।
अशोक चक्र – यह निरंतर प्रगति, न्याय और कर्तव्य का संदेश देगा।
हिमालय – यह भारत की ऊँचाई, दृढ़ता, प्राकृतिक सौंदर्य और सुरक्षा का प्रतीक होगा।
गंगा नदी – यह भारतीय संस्कृति, जीवन, पवित्रता और कृषि-संपन्नता को दर्शाएगी।
किसान और फसलें – ये भारत की कृषि-परंपरा, श्रम और खाद्य-संपन्नता का प्रतिनिधित्व करेंगे।
उपग्रह और रॉकेट – ये आधुनिक भारत की वैज्ञानिक तथा तकनीकी प्रगति को दिखाएँगे।
विभिन्न वेशभूषाओं में लोग – ये भारत की सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक विविधता को प्रकट करेंगे।
राष्ट्रीय पशु और पक्षी – बाघ भारत की शक्ति और मोर उसकी प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाएगा।
पुस्तक और दीपक – ये भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा, शिक्षा और जागरूकता के प्रतीक होंगे।
आवरण के नीचे यह पंक्ति लिखी जा सकती है—
“अनेक रंगों से सजा, एकता के सूत्र में बँधा भारत।”
प्रश्न 3. नदी की यात्रा
गंगा नदी की अपने उद्गम स्रोत से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक यात्रा- वृत्तांत लिखिए।
(संकेत – पर्वतीय सौंदर्य से लेकर गंगासागर तक की संस्कृति इत्यादि)
उत्तर:
यात्रा-वृत्तांत
शीर्षक: हिमालय से गंगासागर तक गंगा की अनुपम यात्रा
गंगा की यात्रा केवल एक नदी का प्रवाह नहीं, बल्कि भारत की प्रकृति, संस्कृति और सभ्यता की जीवंत यात्रा है। इसका आरंभ हिमालय के बर्फीले क्षेत्र में गंगोत्री के निकट होता है। पर्वतीय क्षेत्र में इसका जल अत्यंत ठंडा, स्वच्छ और तेज गति से बहने वाला होता है। आसपास बर्फ से ढकी चोटियाँ, देवदार के वृक्ष और गहरी घाटियाँ दिखाई देती हैं।
पहाड़ों से आगे बढ़ती हुई गंगा ऋषिकेश और हरिद्वार पहुँचती है। यहाँ उसका वेग कुछ कम हो जाता है और वह मैदानों में प्रवेश करती है। हरिद्वार के घाटों पर होने वाली गंगा आरती, जलते हुए दीपक और मंत्रों की ध्वनि पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए श्रद्धालु यहाँ एक साथ दिखाई देते हैं।
मैदानी क्षेत्रों से गुजरते हुए गंगा खेतों को सींचती और अनेक नगरों तथा गाँवों को जीवन प्रदान करती है। प्रयागराज में वह यमुना से मिलती है। संगम का यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यहाँ लगने वाले मेलों में विभिन्न भाषाओं, वेशभूषाओं और परंपराओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
वाराणसी पहुँचते-पहुँचते गंगा का स्वरूप गंभीर और शांत हो जाता है। यहाँ के प्राचीन घाट, मंदिर, आरती, संगीत और नावों की कतारें भारत की पुरानी संस्कृति की याद दिलाती हैं। सुबह के समय सूर्य की किरणों से चमकता गंगा का जल बहुत सुंदर दिखाई देता है।
इसके बाद गंगा बिहार के उपजाऊ मैदानों से होकर गुजरती है। यहाँ वह कृषि, व्यापार और जनजीवन को समृद्ध बनाती है। उसके किनारे हिंदी, भोजपुरी, मैथिली, मगही और अन्य भाषाओं के स्वर सुनाई देते हैं।
पश्चिम बंगाल में पहुँचकर गंगा अनेक धाराओं में बँट जाती है। यहाँ का वातावरण, भाषा, खान-पान और लोकसंस्कृति फिर बदल जाती है। अंततः वह विशाल रूप धारण करके गंगासागर में बंगाल की खाड़ी से मिल जाती है।
हिमालय की शांत चोटियों से समुद्र की विशालता तक गंगा की यात्रा हमें विविधता, निरंतरता और सेवा का संदेश देती है। वह मार्ग में आने वाली बाधाओं से बिना रुके आगे बढ़ती है और असंख्य लोगों को जीवन देती है। गंगा का यह सफर भारत की एकता और सभ्यता का सुंदर प्रतीक है।
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
बहुभाषी देश हमारा
भारत की एक विशेषता उसकी बहुभाषिकता है। यदि आपको एक सचेत नागरिक के रूप में भारत से अपनी मातृभाषा में संवाद का अवसर मिले तो आप किन विषयों पर और क्या-क्या संवाद करना चाहेंगे? इन संवादों को अपनी मातृभाषा और हिंदी में लिखिए।
(संकेत – समाज, पर्यावरण, संस्कृति आदि।)
उत्तर: नोट – विद्यार्थी अपनी मातृभाषा के अनुसार इस संवाद को बदल सकते हैं। यहाँ कन्नड़ और हिंदी में पर्यावरण संरक्षण पर एक उदाहरण प्रस्तुत है।
विषय: पर्यावरण संरक्षण
मातृभाषा—कन्नड़
रवि: ಭಾರತ ನಮ್ಮೆಲ್ಲರ ದೇಶ. ಅದನ್ನು ಸ್ವಚ್ಛವಾಗಿಡುವುದು ನಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ.
अर्थ: भारत हम सभी का देश है। उसे स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है।
अमित: ಹೌದು, ನಾವು ಮರಗಳನ್ನು ನೆಟ್ಟು ನೀರನ್ನು ಉಳಿಸಬೇಕು.
अर्थ: हाँ, हमें पेड़ लगाने और पानी बचाने की आवश्यकता है।
रवि: ನದಿಗಳಲ್ಲಿ ಕಸ ಹಾಕಬಾರದು ಮತ್ತು ಪ್ಲಾಸ್ಟಿಕ್ ಬಳಕೆಯನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಬೇಕು.
अर्थ: हमें नदियों में कचरा नहीं डालना चाहिए और प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए।
अमित: ಪ್ರಕೃತಿಯನ್ನು ರಕ್ಷಿಸಿದರೆ ದೇಶದ ಭವಿಷ್ಯವೂ ಸುರಕ್ಷಿತವಾಗುತ್ತದೆ.
अर्थ: प्रकृति की रक्षा करने से देश का भविष्य भी सुरक्षित होगा।
मानक हिंदी में संवाद
रवि: भारत हम सभी का देश है। इसकी स्वच्छता और प्राकृतिक संपदा की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
अमित: हाँ, हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पानी की बचत करने की आवश्यकता है।
रवि: हमें नदियों में कचरा नहीं डालना चाहिए और प्लास्टिक का प्रयोग कम करना चाहिए।
अमित: प्रकृति को सुरक्षित रखकर ही हम अपने देश और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं।
मातृभाषा और भाव
“स्तव कर बहु-अर्थ-भरे”
उपर्युक्त पंक्ति में भारत की प्रशंसा विविध अर्थों में की गई है। आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में भी लिखिए।
उत्तर: कविता: मेरा प्यारा भारत
हिमालय जिसका ऊँचा मस्तक,
गंगा जिसका हार है।
हरे-भरे खेतों से सजता,
सुंदर हिंदुस्तान है।
भाषाएँ इसकी अनेक हैं,
फिर भी एक विचार है।
प्रेम, शांति और भाईचारा,
भारत का आधार है।
ज्ञान-विज्ञान में आगे बढ़ता,
युवाओं में विश्वास है।
मेरी मातृभूमि भारत पर,
हम सबको अभिमान है।
भावार्थ:
इस कविता में भारत की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता की प्रशंसा की गई है। हिमालय को भारत का मस्तक और गंगा को उसका हार बताया गया है। भारत में अनेक भाषाएँ और संस्कृतियाँ हैं, फिर भी सभी लोग प्रेम और भारतीयता की भावना से जुड़े हैं। ज्ञान, विज्ञान और युवा शक्ति के कारण भारत लगातार प्रगति कर रहा है। कविता मातृभूमि के प्रति प्रेम और गौरव की भावना व्यक्त करती है।
समास-समस्त पद एवं विग्रह
“कनक शस्य कमलधरे”
उपर्युक्त पंक्ति में ‘कनक शस्य’ का अर्थ है- कनक के समान शस्य (सोने जैसी फसलें) और कमलधरे का अर्थ है- हे कमल को धारण करने वाली ! ये शब्द समास शब्द कहलाते हैं। ‘कनक शस्य’ और ‘कमलधरे’ समस्त पद / सामासिक पद हैं। कमलधरे संबोधन शब्द है।
समास का अर्थ है- संक्षेप । समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। समास-रचना में प्रायः दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। समास – रचना से बने शब्द को ‘समस्त पद’ कहते हैं। यदि समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग अलग-अलग करने हों, तो उस प्रक्रिया को समास विग्रह कहते हैं। आपने ‘क्या लिखूँ?’ निबंध के अभ्यास में समास और सामासिक पदों के बारे में विस्तार से जाना है।
कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास – स- विग्रह अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
शब्द: शतदल
समास-विग्रह: सौ दलों अर्थात पंखुड़ियों का समूह
समास का भेद: द्विगु समास
शब्द: ज्योतिर्जल
समास-विग्रह: ज्योति से युक्त जल अथवा चमकता हुआ जल
समास का भेद: कर्मधारय समास
शब्द: शतमुख
समास-विग्रह: सौ मुखों का समूह
समास का भेद: द्विगु समास
शब्द: सागरजल
समास-विग्रह: सागर का जल
समास का भेद: संबंध तत्पुरुष समास
शब्द: हिम-तुषार
समास-विग्रह: हिम के समान तुषार अथवा बर्फरूपी तुषार
समास का भेद: कर्मधारय समास
शब्द: चरण-युगल
समास-विग्रह: दो चरणों का समूह
समास का भेद: द्विगु समास
अलंकार-समझ और प्रयोग
“शतमुख-शतरव-मुखरे!”
उपर्युक्त पंक्ति के ‘शतमुख’ और ‘शतरव’ में ‘श’ वर्ण की पुनरावृत्ति हो रही है, इसीलिए यहाँ अनुप्रास अलंकार है।
“मुकुट शुभ्र हिम- तुषार”
उपर्युक्त पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट कहा गया है। वास्तव में हिमालय मुकुट नहीं है, लेकिन कवि ने कल्पना के बल पर उसे मुकुट का रूप दे दिया। इससे भारत की छवि भव्य और दिव्य बन जाती है। यहाँ गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय में उपमान का अभेद स्थापित किया गया है, इसीलिए यहाँ रूपक अलंकार है।
‘रैदास के पद’ पाठ में आपने अलंकार के विषय में विस्तार से जाना – समझा है। अब निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।
उत्तर:
अनुप्रास अलंकार में किसी एक वर्ण या ध्वनि की बार-बार पुनरावृत्ति होती है। कविता में अनुप्रास अलंकार के उदाहरण निम्नलिखित हैं—
“धवल धार हार गले”
इस पंक्ति में ‘ध’ और ‘ह’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार उत्पन्न हुआ है।
“शतमुख-शतरव-मुखरे!”
इस पंक्ति में ‘श’ वर्ण की बार-बार आवृत्ति हुई है।
“तरु-तृण-वन-लता-वसन”
इस पंक्ति में ‘त’ और ‘व’ वर्ण की पुनरावृत्ति दिखाई देती है।
“प्राण प्रणव ओंकार”
इस पंक्ति में ‘प्र’ ध्वनि की पुनरावृत्ति हुई है।
इन वर्णों की आवृत्ति से कविता में लय, मधुरता और प्रभाव उत्पन्न होता है।
(ख) कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?
उत्तर: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच अंतर समाप्त करके दोनों को एक ही रूप में प्रस्तुत किया जाता है। कविता में रूपक अलंकार के निम्नलिखित उदाहरण हैं—
पंक्ति: “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार”
चित्रण – बर्फ से ढके हिमालय को भारतमाता के मस्तक पर सुशोभित सफेद मुकुट के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
पंक्ति: “धवल धार हार गले”
चित्रण – गंगा की स्वच्छ और उज्ज्वल धारा को भारतमाता के गले का हार बताया गया है।
पंक्ति: “तरु-तृण-वन-लता-वसन”
चित्रण – भारत की हरियाली, पेड़, घास, वन और लताओं को भारतमाता के वस्त्र के रूप में चित्रित किया गया है।
पंक्ति: “अंचल में खचित सुमन”
चित्रण – धरती पर खिले हुए फूलों को भारतमाता के आँचल में जड़े सुंदर फूलों और रत्नों के समान दिखाया गया है।
पंक्ति: “लंका पदतल शतदल”
चित्रण – भारत के दक्षिण में स्थित लंका को भारतमाता के चरणों के पास खिले हुए कमल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
पंक्ति: “कनक-शस्य-कमलधरे”
चित्रण – भारत की सुनहरी फसलों को भारतमाता द्वारा धारण किए गए कमल के रूप में दिखाया गया है।
इस प्रकार कवि ने पूरे भारत को एक भव्य देवी के रूप में चित्रित किया है। हिमालय उनका मुकुट, गंगा उनका हार, हरियाली उनके वस्त्र और सुनहरी फसलें उनके हाथों के कमल हैं।
गतिविधियाँ
मिलकर लें शपथ
“तरु-तृण-वन- लता वसन/ अंचल में खचित सुमन” वन, लता, पुष्प आदि भारत के अमूल्य प्राकृतिक संसाधन हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियमों के बारे में सूचना एकत्रित कीजिए और वन संरक्षण के लिए बनाए नियमों पर विचार कीजिए।
उत्तर:
भारत में वनों, वन्यजीवों और पर्यावरण की रक्षा के लिए कई प्रमुख कानून बनाए गए हैं—
1. भारतीय वन अधिनियम, 1927
इस अधिनियम में वनों के वर्गीकरण, वन-उत्पादों के उपयोग और लकड़ी की कटाई तथा परिवहन से जुड़े नियम दिए गए हैं।
2. वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980
इसका उद्देश्य वन भूमि को गैर-वन कार्यों में बदलने पर नियंत्रण रखना और वन क्षेत्रों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
3. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
यह अधिनियम वन्य जीवों, पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों को शिकार तथा अवैध व्यापार से सुरक्षा प्रदान करता है।
4. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
यह पर्यावरण, वन, जल, वायु और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए व्यापक प्रावधान उपलब्ध कराता है।
वन संरक्षण के लिए आवश्यक नियम
बिना अनुमति पेड़ों की कटाई नहीं करनी चाहिए।
खाली भूमि पर अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए।
जंगलों में आग जलाने और कचरा फेंकने से बचना चाहिए।
वन्यजीवों का शिकार या उनके आवासों को नष्ट नहीं करना चाहिए।
कागज, लकड़ी और अन्य वन-उत्पादों का सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए।
अवैध पेड़ कटाई की सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए।
स्थानीय लोगों को वन संरक्षण अभियानों में शामिल करना चाहिए।
वन संरक्षण की शपथ
“हम शपथ लेते हैं कि पेड़-पौधों, वनों और वन्यजीवों की रक्षा करेंगे। हम बिना कारण किसी पेड़ को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे, अधिक से अधिक पौधे लगाएँगे और प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करेंगे। हम अपने आसपास के लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे।”
भाषा संगम
“कनक शस्य कमलधरे”
कविता में आए ‘शस्य’ शब्द का अर्थ ‘उपज’ भी होता है। नीचे ‘उपज’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
जो उपजा हो, पैदावार, फसल (हिंदी); शस्यम् (संस्कृत); उपज, पैदावार (पंजाबी), पैदावार (उर्दू); पॉदावार (कश्मीरी); उपज, पैदावार (सिंधी); पीक (मराठी); ऊपज, पेदाश (गुजराती); पीक न (कोंकणी; उब्जाबाली, उपज (नेपाली); फसल (बांग्ला) ; शस्य, खेति, फचल, कृषि जात ऋतु (असमिया); महै मरोङ थाबा पोत्थोक (मणिपूरी); फसल, खेति (ओड़िआ); पंट (तेलुगु); विळैच्चल् (तमिल); विळवु (मलयालम); बेळे फसलु (कन्नड़)।
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘शस्य’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर: अन्य भाषाओं में ‘शस्य’ अथवा ‘उपज’ के लिए प्रयुक्त शब्द—
भोजपुरी – फसल अथवा उपज
हरियाणवी – पैदावार
राजस्थानी – उपज
अवधी – फसल
मैथिली – उपज
“कनक शस्य कमलधरे” का सरल अर्थ है—
“हे सोने के समान चमकती फसलों को कमल की तरह धारण करने वाली भारतमाता!”
कन्नड़ में—
“ಚಿನ್ನದಂತೆ ಹೊಳೆಯುವ ಬೆಳೆಗಳ ಕಮಲವನ್ನು ಧರಿಸಿದ ಭಾರತಮಾತೆ!”
भोजपुरी में—
“सोना जइसन चमकत फसल-कमल धारण करे वाली भारत माता!”
विद्यार्थी इस पंक्ति को अपनी मातृभाषा में लिखने के लिए परिवार के सदस्यों अथवा शिक्षक की सहायता ले सकते हैं।
झरोखे से
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की भाँति मैथिलीशरण गुप्त ने भी भारत का मनोरम और ओजस्वी गुणगान किया है। आइए, नीचे उनकी चर्चित कविता ‘जय जय भारतमाता’ का एक अंश पढ़ते हैं।
उत्तर:
विद्यार्थी पुस्तकालय, विद्यालय की हिंदी पुस्तक अथवा विश्वसनीय शैक्षिक स्रोत से मैथिलीशरण गुप्त की ‘जय जय भारतमाता’ कविता खोजकर पढ़ें।
कविता पढ़ते समय निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है—
कविता में भारतमाता का स्वरूप
प्रकृति और संस्कृति का वर्णन
देशप्रेम और राष्ट्रीय गौरव की भावना
कविता की भाषा और लय
‘भारति, जय, विजयकरे’ तथा ‘जय जय भारतमाता’ में समानताएँ
दोनों कविताओं में प्रयुक्त प्रतीक और अलंकार
अध्ययन के बाद विद्यार्थी दोनों कविताओं के भावों की तुलना करते हुए कक्षा में अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं।
खोजबीन
प्रश्न 1. देशप्रेम से संबंधित अन्य कविताएँ पुस्तकालय, इंटरनेट से खोजकर पढ़िए और किसी एक कविता का कक्षा में वाचन भी कीजिए ।
उत्तर: विद्यार्थी देशप्रेम से संबंधित निम्नलिखित कविताओं में से किसी एक को खोजकर पढ़ सकते हैं—
‘पुष्प की अभिलाषा’—माखनलाल चतुर्वेदी
‘झाँसी की रानी’—सुभद्रा कुमारी चौहान
‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’—जयशंकर प्रसाद
‘वीरों का कैसा हो वसंत’—सुभद्रा कुमारी चौहान
‘जय जय भारतमाता’—मैथिलीशरण गुप्त
कविता के वाचन से पहले विद्यार्थी कवि का नाम, कविता का विषय और उसका मुख्य संदेश बता सकते हैं। वाचन करते समय स्पष्ट उच्चारण, उचित गति, भाव और स्वर के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखना चाहिए।
प्रश्न 2. इस कविता की तरह ही संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से युक्त निराला की एक अन्य कविता, ‘वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ पुस्तकालय, इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर:
विद्यार्थी सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता ‘वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ को पुस्तकालय अथवा विश्वसनीय शैक्षिक स्रोत से खोजकर पढ़ें।
कविता पढ़ते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें—
वीणावादिनी से कवि की प्रार्थना
ज्ञान, स्वतंत्रता और नवचेतना की भावना
संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का प्रयोग
अनुप्रास और अन्य अलंकार
कविता की लय तथा ओज
भारति, जय, विजयकरे’ से भाषा और भाव की समानता
कविता पढ़ने के बाद विद्यार्थी कठिन शब्दों के अर्थ लिखें और उसके मुख्य भाव को अपने शब्दों में कक्षा के सामने प्रस्तुत करें।
How to Prepare with Vedantu’s Chapter 10 भारति जय विजय करे for Class 9 Hindi Exams?
Questions from this poem are mostly based on the bhaavarth (meaning), figures of speech (anupras, rupak, manvikaran), and symbols (Himalaya = crown, Ganga = necklace). While writing answers, quoting lines from the poem and explaining the Sanskritised words earns marks. The meaning of 'कनक-शस्य-कमलधरे' is the most frequently asked question. For complete preparation, use Vedantu's Chapter 10 Revision Notes and Important Questions.
CBSE Class 9 Hindi Chapter 10 Bharati Jai Vijay Kare Other Study Materials
S.No | Important Links for Chapter 10 Class 9 Hindi |
1 | Class 9 Bharati Jai Vijay Kare Important Questions |
2 | Class 9 Bharati Jai Vijay Kare Revision Notes |
Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga
Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.
S.No | NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF |
1 | Chapter 1 - Do Bailon Ki Katha Solutions |
2 | Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions |
3 | Chapter 3 - Samvaadheen Solutions |
4 | Chapter 4 - Aisi Bhi Baatein Hoti Hein Solutions |
5 | Chapter 5 - Aakhri Chataan Tak Solutions |
6 | Chapter 6 - Reedh Ki Haddi Solutions |
7 | Chapter 7 - Main Aur Mera Desh Solutions |
8 | Chapter 8 - Pad Solutions |
9 | Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions |
10 | Chapter 11 - Jhansi Ki Rani Solutions |
11 | Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions |
Additional Study Materials for Class 9 Hindi
S.No | Important Study Material for Hindi Class 9 |
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FAQs on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 Bharati Jai Vijay Kare 2026-27
1. Where can I download the Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे PDF?
Students can download the FREE PDF of NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे from Vedantu.
2. Who is the poet of भारति, जय, विजयकरे, and what is the poem about from Class 9 Hindi Ganga?
भारति, जय, विजयकरे was written by Suryakant Tripathi ‘Nirala’. The poem praises India’s natural beauty, golden crops, rivers, mountains, spiritual knowledge, cultural diversity, and national greatness.
3. भारति, जय, विजयकरे कविता में हिमालय और गंगा को किस रूप में प्रस्तुत किया गया है?
कविता में बर्फ से ढके हिमालय को भारतमाता का शुभ्र मुकुट और गंगा की स्वच्छ धारा को उनके गले का उज्ज्वल हार बताया गया है। इन प्रतीकों के माध्यम से कवि ने भारत के प्राकृतिक सौंदर्य, पवित्रता और गौरव को व्यक्त किया है।
4. भारति, जय, विजयकरे कविता में कौन-कौन से अलंकार प्रयुक्त हुए हैं?
कविता में मुख्य रूप से अनुप्रास, रूपक और मानवीकरण अलंकार का प्रयोग हुआ है। “शतमुख-शतरव-मुखरे” में अनुप्रास, “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” में रूपक और समुद्र द्वारा भारतमाता के चरण धोने के वर्णन में मानवीकरण अलंकार है।
5. Why is the language of NCERT Class 9 Hindi Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे described as Sanskritised?
The poem uses several Sanskrit-based and compound words, such as कनक-शस्य-कमलधरे, प्राण प्रणव ओंकार, ज्योतिर्जल-कण, and हिम-तुषार. These words make the language grand, rhythmic, and suitable for expressing national pride.
6. How can Vedantu’s Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 NCERT Solutions help students prepare for exams?
Vedantu’s solutions explain every question, poetic line, figure of speech, and grammar exercise in simple language. Students can use them to understand the poem, practise exam-ready answers, complete homework, and revise quickly before tests.



















