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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 Jhansi Ki Rani 2026-27

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Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 झाँसी की रानी NCERT Solutions - FREE PDF Download

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 झाँसी की रानी (Jhansi Ki Rani) provide clear, detailed answers to every question from this famous patriotic poem by कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान. The poem celebrates the bravery of Rani Lakshmibai of Jhansi in the 1857 freedom struggle, immortalised in the line "खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।"


Prepared by Vedantu's expert Hindi teachers as per the CBSE 2026-27 syllabus each answer explains the भावार्थ, figures of speech, and message in simple language. Download the FREE PDF and revise all question-answers anytime, even offline.

Access NCERT Solutions for Class 9 Ganga Chapter 11 झाँसी की रानी

अभ्यास (पृष्ठ 184-192)

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

प्रश्न 1. ‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
(क) देश का स्वाभिमान
(ख) विद्रोह की चिंगारी
(ग) स्वाधीनता का भय
(घ) भारत की युवावस्था

उत्तर: (ख) विद्रोह की चिंगारी।

क्यों – लंबे समय से अंग्रेजों की गुलामी और अत्याचार सह रहे भारतीयों के मन में स्वतंत्रता प्राप्त करने का नया उत्साह जाग उठा था। देश के विभिन्न वर्ग अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करने लगे थे। इसी क्रांतिकारी चेतना, उत्साह और विद्रोह की भावना को कवयित्री ने ‘नई जवानी’ कहा है।


प्रश्न 2. लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
(क) विनम्रता
(ख) शोभायुक्त
(ग) सहिष्णुता
(घ) कठोरता

उत्तर: (ख) शोभायुक्त।

क्यों – ‘छबीली’ का अर्थ सुंदर, आकर्षक, प्रसन्न और चंचल स्वभाव वाली होता है। बचपन में लक्ष्मीबाई अत्यंत साहसी, तेजस्वी, चंचल और प्रभावशाली थीं। उनके इसी आकर्षक और उत्साहपूर्ण व्यक्तित्व के कारण उन्हें प्यार से ‘छबीली’ कहा जाता था।


प्रश्न 3. “बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है-
(क) अंग्रेजों का झाँसी पर अधिकार हो जाना
(ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
(ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
(घ) रानी के जीवन में उदासी होना

उत्तर: (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना।

क्यों – झाँसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद राजपरिवार और पूरे झाँसी राज्य पर दुख छा गया। राजा को राज्य का दीपक मानते हुए उनकी मृत्यु को ‘झाँसी का दीप बुझना’ कहा गया है। इसके बाद अंग्रेजों को झाँसी पर अधिकार करने का अवसर भी मिल गया।


प्रश्न 4. “इस स्वतंत्रता – महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
(क) असहयोग आंदोलन
(ख) भारत छोड़ो आंदोलन
(ग) 1857 की क्रांति
(घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन

उत्तर: (ग) 1857 की क्रांति।

क्यों – ‘झाँसी की रानी’ कविता की पृष्ठभूमि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित है। इस संघर्ष में रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब, तात्या टोपे, अजीमुल्ला खाँ, कुँवर सिंह और अनेक वीरों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध युद्ध किया तथा देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया।


प्रश्न 5. “व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
(क) नवाबों के लिए
(ख) जनरल डलहौजी के लिए
(ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
(घ) ब्रिटिश राज के लिए

उत्तर: (घ) ब्रिटिश राज के लिए।

क्यों – अंग्रेज प्रारंभ में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारियों के रूप में भारत आए थे। उन्होंने भारतीय शासकों से व्यापार करने की अनुमति और सुविधाएँ प्राप्त कीं। धीरे-धीरे उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप, युद्ध, छल और अनुचित नीतियों के माध्यम से भारतीय राज्यों पर अधिकार कर लिया। इसलिए ‘यह’ शब्द अंग्रेजी सत्ता या ब्रिटिश राज के लिए प्रयुक्त हुआ है।


मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

प्रश्न 1. ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?

उत्तर: लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल नकली युद्ध करना, व्यूह-रचना बनाना, शिकार खेलना, घुड़सवारी करना और शत्रु के किलों को जीतने का अभ्यास करना थे। उन्हें तलवार, बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी जैसे अस्त्र-शस्त्र चलाने में विशेष रुचि थी।

उनका बचपन सामान्य बच्चों, विशेष रूप से उस समय की अन्य लड़कियों से बहुत अलग था। जहाँ अधिकांश लड़कियाँ गुड़ियों और घरेलू खेलों में रुचि लेती थीं, वहीं लक्ष्मीबाई युद्ध-कौशल, घुड़सवारी और शस्त्र संचालन का अभ्यास करती थीं। नाना साहब के साथ खेलते हुए उन्होंने साहस, वीरता और नेतृत्व के गुण विकसित किए। उनका बचपन ही उनके भविष्य के वीर और संघर्षशील व्यक्तित्व की नींव बना।


प्रश्न 2. “किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से झाँसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु और उसके बाद झाँसी पर आए गंभीर संकट की ओर संकेत किया गया है। राजा की मृत्यु से रानी लक्ष्मीबाई विधवा हो गईं और राज्य के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए।

‘काली घटा’ दुख, संकट और दुर्भाग्य का प्रतीक है। राजा की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने रानी के दत्तक पुत्र को वैध उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और झाँसी पर अधिकार करने की योजना बनाई। इस प्रकार यह घटना रानी के व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ पूरे झाँसी राज्य के लिए भी एक बड़े संकट का कारण बनी।


प्रश्न 3. “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?

उत्तर: “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति का अर्थ है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राजाओं, रानियों और नवाबों के साथ-साथ किसान, सैनिक, मजदूर और सामान्य नागरिक भी शामिल हुए थे। अंग्रेजों के अन्याय और शोषण से समाज का प्रत्येक वर्ग प्रभावित था।

स्वतंत्रता संग्राम के लिए यह एकता बहुत महत्त्वपूर्ण थी। अलग-अलग वर्गों के लोग जब अपने व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर एक उद्देश्य के लिए एकजुट हुए, तब अंग्रेजी सत्ता की नींव हिल गई। यह पंक्ति बताती है कि राष्ट्रीय संघर्ष केवल राजमहलों तक सीमित नहीं था, बल्कि उसकी ज्वाला सामान्य लोगों की झोंपड़ियों तक फैल चुकी थी।

किसी भी राष्ट्रीय आंदोलन की सफलता के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक होता है। 1857 की क्रांति में दिखाई देने वाली यह एकजुटता भारतीय राष्ट्रीय चेतना के विकास की महत्त्वपूर्ण शुरुआत थी।


प्रश्न 4. “सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?

उत्तर: ‘नीलाम छापते’ का अर्थ है अखबारों में सार्वजनिक नीलामी की सूचना या विज्ञापन प्रकाशित करना। अंग्रेज भारतीय राज्यों पर अधिकार करने के बाद राजपरिवारों की बहुमूल्य वस्तुओं, आभूषणों, कपड़ों और अन्य संपत्तियों को खुले बाजार में नीलाम कर देते थे।

कविता में नागपुर के गहनों और लखनऊ के बहुमूल्य हारों की नीलामी का उल्लेख किया गया है। अंग्रेजों का उद्देश्य भारतीय राजाओं और नवाबों की संपत्ति लूटना, उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर करना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करना था।

इस प्रकार नीलामी केवल वस्तुओं की बिक्री नहीं थी। वह भारतीय शासकों के गौरव, सम्मान और स्वतंत्र सत्ता को नष्ट करने वाली अंग्रेजों की अपमानजनक नीति का प्रतीक थी।


प्रश्न 5. “अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?

उत्तर: कविता में रानी लक्ष्मीबाई को उनके असाधारण साहस, वीरता, त्याग और देशभक्ति के कारण ‘अवतारी’ कहा गया है। बहुत कम आयु में उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया और शक्तिशाली अंग्रेजी सेना के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय युद्ध करना स्वीकार किया।

रानी लक्ष्मीबाई एक कुशल घुड़सवार, तलवारबाज और युद्ध-नेता थीं। उन्होंने अपने सैनिकों को संगठित किया, झाँसी की रक्षा की और अंत तक अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया। वे अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बाँधकर रणभूमि में लड़ीं और देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया।

उनका साहस, आत्मसम्मान, नेतृत्व, मातृभूमि के प्रति प्रेम और बलिदान सामान्य मनुष्य से कहीं अधिक असाधारण था। इसलिए कवयित्री ने उन्हें प्रतीकात्मक रूप से देवी दुर्गा के समान ‘अवतारी’ कहा है।


विधा से संवाद

कविता में कहानी

यह कविता लक्ष्मीबाई के जीवन की घटनाओं पर आधारित है और अपनी संरचना में एक कथात्मक कविता है। कथात्मक कविता ऐसी कविता को कहते हैं जिसमें कविता और कहानी के तत्व परस्पर जुड़े होते हैं तथा घटनाओं का एक क्रम होता है। इस कविता में भी लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर वीरगति प्राप्त होने तक की कथा क्रम से देखने को मिलती है। पाठ की संरचना को समझते हुए इसमें वर्णित प्रमुख घटनाओं को समय-रेखा (टाइमलाइन) पर दर्शाएँ।
(संकेत – लक्ष्मीबाई का बचपन, विवाह, अन्य घटनाएँ आदि।)

उत्तर: रानी लक्ष्मीबाई के जीवन की समय-रेखा

1. जन्म और बचपन

लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम मनु था। उनका बचपन बिठूर में नाना साहब के साथ बीता। उन्हें प्यार से ‘छबीली’ कहा जाता था।

2. युद्ध-कौशल का प्रशिक्षण

बचपन से ही मनु को घुड़सवारी, तलवारबाजी, तीरंदाजी, शिकार और नकली युद्ध खेलना पसंद था। उनके खिलौने बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी थे।

3. झाँसी के राजा से विवाह

मनु का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से हुआ। विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा और वे झाँसी की रानी बनीं।

4. राजा गंगाधर राव की मृत्यु

राजा की मृत्यु के बाद झाँसी पर दुख और संकट छा गया। रानी ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार किया।

5. अंग्रेजों द्वारा झाँसी हड़पने का प्रयास

अंग्रेजों ने रानी के दत्तक पुत्र को राज्य का वैध उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया। Doctrine of Lapse के आधार पर झाँसी को अंग्रेजी राज्य में मिलाने का प्रयास किया गया।

6. 1857 की क्रांति

देश के विभिन्न भागों में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह प्रारंभ हुआ। झाँसी भी क्रांति का प्रमुख केंद्र बनी और रानी ने अंग्रेजों का सामना करने की तैयारी की।

7. झाँसी की रक्षा

रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी सेना का नेतृत्व किया और अंग्रेजी सैनिकों के विरुद्ध साहसपूर्वक युद्ध किया। उन्होंने झाँसी की स्वतंत्रता बचाने का पूरा प्रयास किया।

8. किले से निकलना

विपरीत परिस्थितियों में रानी अपने पुत्र को पीठ पर बाँधकर घोड़े पर सवार हुईं और अंग्रेजी सेना का घेरा तोड़कर बाहर निकल गईं।

9. कालपी और ग्वालियर में संघर्ष

रानी ने अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर कालपी और ग्वालियर में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा।

10. वीरगति

अंतिम युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई ने असाधारण वीरता दिखाई और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। उनका साहस भारतीय इतिहास में अमर हो गया।


विषयों से संवाद

साझा साथ / साझा संघर्ष

प्रश्न 1. “लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”, ब्रिटिश राज किस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था ? अपने इतिहास के शिक्षक से पता लगाकर उस नीति के विषय में लिखिए।

उत्तर: ब्रिटिश शासन की इस नीति को ‘हड़प नीति’ अथवा Doctrine of Lapse कहा जाता था। इसे गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी ने भारतीय राज्यों को अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाने के लिए अपनाया था।

इस नीति के अनुसार यदि किसी देशी राज्य के शासक की मृत्यु बिना किसी प्राकृतिक पुत्र के हो जाती थी, तो उसके गोद लिए हुए पुत्र को अंग्रेज राज्य का वैध उत्तराधिकारी नहीं मानते थे। ऐसी स्थिति में अंग्रेज उस राज्य को ‘उत्तराधिकारीहीन’ बताकर अपने शासन में मिला लेते थे।

राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद रानी लक्ष्मीबाई ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र और झाँसी का उत्तराधिकारी घोषित किया था। अंग्रेजों ने दामोदर राव को उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और झाँसी को अपने राज्य में मिलाने का प्रयास किया।

इसी कारण कविता में अंग्रेजों को “लावारिस का वारिस” कहा गया है। वे जिस राज्य का प्राकृतिक उत्तराधिकारी नहीं होता था, स्वयं को उसका वारिस घोषित करके उस पर अधिकार कर लेते थे।


प्रश्न 2. इस कविता में लक्ष्मीबाई की जीवन-गाथा के साथ-साथ अनेक वीरों के त्याग और बलिदान का भी उल्लेख है। उनकी सूची बनाइए तथा शिक्षक की सहायता से 1857 की क्रांति में उनके योगदान के विषय में लिखिए।

उत्तर:

1857 की क्रांति में योगदान देने वाले प्रमुख वीर निम्नलिखित हैं—

1. रानी लक्ष्मीबाई

रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अंग्रेजों से युद्ध किया। उन्होंने अपनी सेना का नेतृत्व किया और अंत तक आत्मसमर्पण नहीं किया। कालपी और ग्वालियर में भी उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा तथा युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की।


2. नाना धुंधूपंत

नाना धुंधूपंत को नाना साहब के नाम से भी जाना जाता था। वे कानपुर में 1857 की क्रांति के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सैनिकों और जनता को संगठित किया तथा पेशवा पद और भारतीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष किया।


3. तात्या टोपे

तात्या टोपे एक कुशल सेनानायक और युद्ध-रणनीतिकार थे। उन्होंने नाना साहब और रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया। अंग्रेजों से कई युद्धों में पराजित होने के बाद भी उन्होंने संघर्ष जारी रखा और छापामार युद्ध-पद्धति का सहारा लिया।


4. अजीमुल्ला खाँ

अजीमुल्ला खाँ नाना साहब के प्रमुख सलाहकार और रणनीतिक सहयोगी थे। उन्होंने अंग्रेजी शासन की नीतियों को समझने, क्रांतिकारियों के बीच संपर्क स्थापित करने और विद्रोह की योजनाएँ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।


5. अहमद शाह मौलवी

अहमद शाह मौलवी, जिन्हें मौलवी अहमदुल्लाह शाह के रूप में भी जाना जाता है, ने अवध क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जनता और सैनिकों को संगठित किया। वे प्रभावशाली वक्ता, धार्मिक नेता और साहसी योद्धा थे।


6. ठाकुर कुँवर सिंह

कुँवर सिंह ने बिहार में 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया। अधिक आयु होने के बावजूद उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध अनेक युद्ध लड़े और अपनी वीरता तथा युद्ध-कौशल से क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।

इन सभी वीरों ने अलग-अलग क्षेत्रों में संघर्ष किया, लेकिन उनका उद्देश्य एक था—भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराना। उनके त्याग और बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।


प्रश्न 3. यह कविता जिस समय और परिवेश में लिखी गई है, उसमें युद्ध और अन्य साहसिक कार्य करना सामान्यतः पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। वर्तमान में लगभग हर क्षेत्र में महिलाएँ कार्य कर रही हैं। नीचे कुछ ऐसे ही कार्यक्षेत्र दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाली स्त्रियों के नाम और उनके विषय में लिखिए। आप चाहें तो इसमें अपनी समझ के अनुसार कुछ और कार्यक्षेत्र भी जोड़ सकते हैं।

क्रम संख्या

कार्य क्षेत्र

1.

दमकल केंद्र (फायर ब्रिगेड)

2.

रेलगाड़ी चालक

3.

खेल के विभिन्न क्षेत्र

4.

व्यापार और प्रबंधन

5.

विज्ञान और तकनीक

उत्तर: वर्तमान समय में महिलाएँ विज्ञान, तकनीक, खेल, परिवहन, सुरक्षा, व्यापार और अन्य चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

1. दमकल केंद्र (फायर ब्रिगेड)

महिला का नाम – हर्षिनी कान्हेकर

योगदान – हर्षिनी कान्हेकर को भारत की पहली महिला फायर फाइटर के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अग्निशमन जैसे कठिन और जोखिमपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश करके यह सिद्ध किया कि महिलाएँ साहस, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी चुनौतीपूर्ण कार्य को कर सकती हैं।


2. रेलगाड़ी चालक

महिला का नाम – सुरेखा यादव

योगदान – सुरेखा यादव भारत और एशिया की पहली महिला लोको पायलट के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने रेलगाड़ी चलाने जैसे पुरुष-प्रधान माने जाने वाले क्षेत्र में सफलता प्राप्त करके अनेक महिलाओं को प्रेरित किया।


3. खेल के विभिन्न क्षेत्र

महिलाओं के नाम – मैरी कॉम, पी.वी. सिंधु और हरमनप्रीत कौर

योगदान – मैरी कॉम ने मुक्केबाजी, पी.वी. सिंधु ने बैडमिंटन और हरमनप्रीत कौर ने क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। इन खिलाड़ियों ने अपने परिश्रम, अनुशासन और उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया है।


4. व्यापार और प्रबंधन

महिलाओं के नाम – इंद्रा नूयी और किरण मजूमदार-शॉ

योगदान – इंद्रा नूयी ने वैश्विक व्यापार और प्रबंधन के क्षेत्र में पहचान बनाई। किरण मजूमदार-शॉ ने जैव-प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों ने नेतृत्व और व्यवसाय में महिलाओं की क्षमता को सिद्ध किया।


5. विज्ञान और तकनीक

महिलाओं के नाम – कल्पना चावला, टेसी थॉमस और रितु करिधल

योगदान – कल्पना चावला ने अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में भारतीय मूल की महिलाओं को प्रेरित किया। टेसी थॉमस ने रक्षा विज्ञान और रितु करिधल ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य किया।


6. भारतीय वायुसेना

महिलाओं के नाम – अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह

योगदान – इन महिलाओं ने भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमान पायलट के रूप में प्रवेश करके साहस और समान अवसर का उदाहरण प्रस्तुत किया।


7. पुलिस और प्रशासन

महिलाओं के नाम – किरण बेदी और अनेक महिला भारतीय प्रशासनिक तथा पुलिस सेवा अधिकारी

योगदान – महिलाओं ने प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सुधार और जनसेवा के क्षेत्र में प्रभावशाली नेतृत्व दिया है।

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि उचित शिक्षा, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।


प्रश्न 4. कविता में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अनेक स्थानों के नाम आए हैं। अपने शिक्षक की सहायता से दिए गए मानचित्र में उन स्थानों / नगरों को चिह्नित करके नाम लिखिए।
स्रोत – https://surveyofindia.gov.in/UserFiles/files/1-16-state%20boundary.pdf


1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अनेक स्थानों के नाम आए हैं। अपने शिक्षक की सहायता से दिए गए मानचित्र में उन स्थानों-नगरों को चिह्नित करके नाम लिखिए


उत्तर: विद्यार्थी भारत के मानचित्र में कविता में आए 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित निम्नलिखित प्रमुख स्थानों को चिह्नित कर सकते हैं—

  • झाँसी – रानी लक्ष्मीबाई के संघर्ष का प्रमुख केंद्र

  • दिल्ली – 1857 के विद्रोह का प्रमुख राजनीतिक केंद्र

  • लखनऊ – अवध के विद्रोह और संघर्ष का केंद्र

  • मेरठ – वह स्थान जहाँ सैनिक विद्रोह ने व्यापक रूप लिया

  • कानपुर – नाना साहब के नेतृत्व में क्रांति का प्रमुख केंद्र

  • पटना – बिहार क्षेत्र में क्रांतिकारी गतिविधियों से संबंधित नगर

  • जबलपुर – मध्य भारत में विद्रोह की गतिविधियों वाला स्थान

  • कोल्हापुर – पश्चिम भारत में हलचल और विरोध का केंद्र

  • ग्वालियर – रानी लक्ष्मीबाई के अंतिम संघर्ष का प्रमुख स्थान

  • बिठूर – नाना साहब का केंद्र और रानी लक्ष्मीबाई के बचपन से संबंधित स्थान

  • नागपुर – अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति से प्रभावित राज्य

  • सतारा – हड़प नीति के अंतर्गत अंग्रेजों द्वारा मिलाया गया राज्य

  • उदयपुर – कविता में उल्लिखित भारतीय राज्य

  • तंजौर – अंग्रेजी विस्तार से प्रभावित दक्षिण भारतीय क्षेत्र

  • कलकत्ता – अंग्रेजी शासन का प्रमुख केंद्र तथा राजपरिवारों की वस्तुओं की नीलामी से संबंधित स्थान

मानचित्र बनाते समय विद्यार्थी अलग-अलग रंगों अथवा संकेतों का प्रयोग कर सकते हैं। विद्रोह के प्रमुख केंद्रों को लाल बिंदु से, रानी लक्ष्मीबाई से संबंधित स्थानों को हरे बिंदु से और अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति से प्रभावित राज्यों को नीले बिंदु से दिखाया जा सकता है।


भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

शब्द एक अर्थ अनेक

प्रश्न 1. “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली थी”

उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए । कविता में ‘नाना’ शब्द ‘नाना धुंधूपंत’ के लिए प्रयुक्त हुआ है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग संदर्भ के अनुसार अन्य अर्थों में भी होता है। जैसे- माता के पिता के लिए तथा अनेक के अर्थ में इस प्रकार अनेकार्थी शब्द वह शब्द है जिसके एक से अधिक अर्थ होते हैं। नीचे तालिका में दी गई कविता की पंक्तियों में रेखांकित शब्द अनेकार्थी शब्द हैं। कविता के संदर्भ में उनके सही अर्थ पर घेरा लगाइए।


कविता के संदर्भ में उनके सही अर्थ पर घेरा लगाइए


उत्तर:

1. “तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई”

सही अर्थ – बाण

यहाँ ‘तीर’ का अर्थ धनुष से चलाए जाने वाले बाण से है।


2. “रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई”

सही अर्थ – विधाता

यहाँ ‘विधि’ का अर्थ भाग्य अथवा विधाता से है।


3. “रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में”

सही अर्थ – युद्ध

यहाँ ‘द्वंद्व’ का अर्थ दो पक्षों के बीच होने वाला युद्ध या संघर्ष है।


4. “हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी”

सही अर्थ – तोप से दागे जाने वाले गोले

यहाँ ‘गोलों’ से आशय अंग्रेजों द्वारा तोपों से दागे जाने वाले विस्फोटक गोलों से है।


5. “मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी”

सही अर्थ – आभा

यहाँ ‘तेज’ का अर्थ वीरता से उत्पन्न दिव्य चमक, शक्ति और आभा है।


प्रश्न 2. “कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी”
“मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी”।

उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों की वर्तनी पर ध्यान दीजिए। दोनों शब्दों की वर्तनी में थोड़ी भिन्नता है। कई बार रचनाकार कविता की लय, अर्थ की लय इत्यादि को ध्यान में रखते हुए भाषा के स्तर पर इस प्रकार का प्रयोग करते रहे हैं। इस कविता में अन्य शब्दों के भी ऐसे प्रयोग मिलते हैं, उन्हें ढूँढ़कर लिखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए। इसी पाठ्यपुस्तक की अन्य कविताओं में भी आपने ऐसा प्रयोग देखा होगा। जहाँ किसी शब्द की मानक वर्तनी से भिन्न वर्तनी का प्रयोग किया गया है। अपने शिक्षक के साथ इस विषय पर चर्चा कीजिए। चर्चा से उभरे बिंदुओं को लिखकर उन पर अपने शिक्षक के साथ पुनः चर्चा कीजिए कि ऐसे प्रयोग क्यों किए गए हैं?

उत्तर: कविता में लय, तुक, मात्रा और उच्चारण को प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ शब्दों की वर्तनी उनके मानक रूप से भिन्न दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, एक स्थान पर ‘कानपूर’ और दूसरे स्थान पर ‘कानपुर’ का प्रयोग किया गया है।

कविता में मिलने वाले ऐसे अन्य संभावित प्रयोग निम्नलिखित हैं—

  • कानपूर – कानपुर

  • नव्वाब – नवाब

  • मरहठा – मराठा

  • कृपाण – किरपान

  • झोंपड़ी – झोपड़ी

इस प्रकार के प्रयोगों के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

  1. कविता के छंद और मात्राओं को संतुलित रखना।

  2. पंक्तियों के बीच तुक और लय बनाए रखना।

  3. क्षेत्रीय उच्चारण और लोकभाषा का प्रभाव प्रस्तुत करना।

  4. कविता को स्वाभाविक और गेय बनाना।

  5. रचना के समय प्रचलित भाषा और वर्तनी का प्रयोग करना।

  6. किसी विशेष भाव, ध्वनि या शब्द पर अधिक बल देना।

इस प्रकार कवि या कवयित्री कभी-कभी काव्यात्मक आवश्यकता के अनुसार मानक वर्तनी से थोड़ा अलग रूप अपनाते हैं। ऐसे प्रयोग को काव्यगत स्वतंत्रता भी कहा जाता है।


मुहावरे

“दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी”

उपर्युक्त पंक्ति में ‘दृढ़ निश्चय करने’ के अर्थ को व्यक्त करने के लिए ‘मन में ठान लेना’ वाक्यांश का प्रयोग हुआ है जो एक मुहावरा है। ‘मुहावरे’ ऐसे वाक्यांश होते हैं जो अपने शाब्दिक अर्थ से भिन्न एक विशेष और लाक्षणिक अर्थ व्यक्त करते हैं। इनके प्रयोग से भाषा में सौंदर्य और प्रभाव उत्पन्न होता है।

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उन पंक्तियों में आए मुहावरे ढूँढ़कर लिखिए और उन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य भी बनाइए। आपकी सुविधा के लिए एक उदाहरण दिया गया है।


पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उन पंक्तियों में आए मुहावरे ढूँढ़कर लिखिए और उन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य भी बनाइए। आपकी सुविधा के लिए एक उदाहरण दिया गया है।


उत्तर:

1. काव्य-पंक्ति – “अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी।”

प्रयुक्त मुहावरा – मुँह की खाना

अर्थ – पराजित होना या प्रयास में असफल होना।

नया वाक्य – विरोधी टीम ने हमारी टीम को कमजोर समझा, लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी।


2. काव्य-पंक्ति – “डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया।”

प्रयुक्त मुहावरा – पैर पसारना

अर्थ – अपना प्रभाव, अधिकार या क्षेत्र बढ़ाना।

नया वाक्य – अंग्रेजों ने व्यापार के बहाने भारत में धीरे-धीरे अपने पैर पसारने शुरू कर दिए।


3. काव्य-पंक्ति – “राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों से ठुकराया।”

प्रयुक्त मुहावरा – पैरों से ठुकराना

अर्थ – अपमानपूर्वक अस्वीकार कर देना।

नया वाक्य – स्वाभिमानी व्यक्ति अन्याय से मिलने वाले लाभ को पैरों से ठुकरा देता है।


4. काव्य-पंक्ति – “हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो / सोई ज्योति जगानी थी।”

प्रयुक्त मुहावरा – ज्योति जगाना

अर्थ – चेतना, आशा अथवा प्रेरणा उत्पन्न करना।

नया वाक्य – स्वतंत्रता सेनानियों ने देशवासियों के मन में आजादी की ज्योति जगाई।


5. काव्य-पंक्ति – “मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी।”

प्रयुक्त मुहावरा – धूम मचाना

अर्थ – अत्यधिक प्रभाव उत्पन्न करना अथवा प्रसिद्धि प्राप्त करना।

नया वाक्य – विद्यालय की कबड्डी टीम ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करके धूम मचा दी।


सृजन

प्रश्न 1. लक्ष्मीबाई की सखियों काना तथा मंदरा की ओर से लक्ष्मीबाई को एक पत्र लिखिए जिसमें काना तथा मंदरा द्वारा ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध युद्ध की रणनीति पर चर्चा की गई हो।

उत्तर:

दिनांक: मार्च 1858
स्थान: झाँसी दुर्ग

आदरणीय रानी माँ,
सादर प्रणाम!

हम दोनों काना और मंदरा आपको यह बताना चाहती हैं कि महिला सैनिक दल ने किले की रक्षा के लिए आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। किले के सभी मुख्य द्वारों, दीवारों और गुप्त मार्गों पर विश्वसनीय सैनिकों को तैनात कर दिया गया है।

हमारी योजना है कि अंग्रेजी सेना के मुख्य द्वार की ओर बढ़ने पर सैनिकों की एक टुकड़ी सामने से उनका मुकाबला करेगी। दूसरी टुकड़ी किले की ऊँची दीवारों से उनकी तोपों और रसद को निशाना बनाएगी। कुछ चुने हुए सैनिक गुप्त मार्गों से निकलकर अंग्रेजी सेना के पीछे पहुँचेंगे और उनके संचार तथा आपूर्ति के साधनों को बाधित करेंगे।

महिला सेना को भी छोटी-छोटी टुकड़ियों में बाँटा गया है। प्रत्येक टुकड़ी के पास तलवार, धनुष-बाण और आवश्यक युद्ध सामग्री रहेगी। घायल सैनिकों की देखभाल और भोजन-पानी की व्यवस्था के लिए भी अलग दल तैयार किया गया है।

हम सभी झाँसी की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए अंतिम साँस तक संघर्ष करने को तैयार हैं। आपका साहस और नेतृत्व ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। हमें विश्वास है कि हमारी एकता, अनुशासन और वीरता अंग्रेजों की योजनाओं को असफल कर देगी।

झाँसी की रक्षा के लिए सदैव तत्पर।

आपकी विश्वस्त सखियाँ
काना और मंदरा


प्रश्न 2. युद्धपूर्व रात्रि में झाँसी की रानी के मन में अगले दिन की संभावनाओं को लेकर कई तरह के भाव और विचार उठ रहे होंगे। आपके जीवन में भी कई ऐसे क्षण आए होंगे जब आपने मानसिक ऊहापोह का अनुभव किया होगा। ऐसी किसी घटना के विषय में अपनी डायरी में लिखिए, जैसे- परीक्षा के एक दिन पूर्व की स्थिति या नौंवी कक्षा में पहला दिन आदि।

उत्तर:

20 मार्च, 2027
रात 11:00 बजे

प्रिय डायरी,

कल मेरी वार्षिक परीक्षा का पहला दिन है। मैंने पूरे वर्ष मन लगाकर पढ़ाई की है और पाठ्यक्रम का कई बार अभ्यास भी कर चुका हूँ। इसके बावजूद मन में बार-बार घबराहट और संदेह उत्पन्न हो रहे हैं।

कभी लगता है कि परीक्षा बहुत अच्छी होगी, तो कभी डर लगता है कि कहीं कोई कठिन प्रश्न न आ जाए। मैं यह भी सोच रहा हूँ कि क्या निर्धारित समय में सभी प्रश्नों के उत्तर लिख पाऊँगा। कुछ अध्यायों को दोबारा पढ़ने की इच्छा हो रही है, लेकिन शरीर और मन दोनों थक चुके हैं।

माँ ने मुझे समझाया कि परीक्षा के समय आत्मविश्वास और धैर्य बनाए रखना सबसे आवश्यक है। उनकी बात सुनकर मुझे कुछ शांति मिली। मैंने अपनी लेखन-सामग्री और प्रवेश-पत्र तैयार करके रख लिया है। अब मैं कुछ देर गहरी साँस लेकर अपने मन को शांत करूँगा और समय पर सोने का प्रयास करूँगा।

मुझे अपनी मेहनत पर विश्वास रखना चाहिए। आशा है कि कल मैं बिना घबराए पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दूँगा।

शुभरात्रि!

अ ब स
[अपना नाम]


गतिविधियाँ

शौर्य के समाचार

यह कविता रानी लक्ष्मीबाई के जीवन की घटनाओं, उनकी वीरता और पराक्रम से हमारा साक्षात्कार कराती है। कविता में वर्णित घटनाओं को एक समाचार वाचक की तरह समाचार के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
(संकेत – “आज झाँसी की रणभूमि पर रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी अद्भुत वीरता और शौर्य का परिचय दिया….. ।”)

उत्तर:

विशेष समाचार बुलेटिन—झाँसी की रणभूमि से

नमस्कार! मैं हूँ आपका समाचार वाचक __________। आज झाँसी की रणभूमि से एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण समाचार सामने आया है।

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजी सेना के विरुद्ध युद्ध में अद्भुत वीरता और साहस का प्रदर्शन किया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रानी स्वयं घोड़े पर सवार होकर अपनी सेना का नेतृत्व कर रही हैं। उनके दोनों हाथों में तलवारें हैं और वे पूरे आत्मविश्वास के साथ शत्रु सेना का सामना कर रही हैं।

अंग्रेजी सेना ने तोपों और प्रशिक्षित सैनिकों की सहायता से झाँसी के किले को घेरने का प्रयास किया, लेकिन रानी और उनके सैनिकों ने कड़ा प्रतिरोध किया। महिला सैनिक दल भी इस संघर्ष में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।

विपरीत परिस्थितियों में रानी अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बाँधकर शत्रु का घेरा तोड़ते हुए सुरक्षित बाहर निकल गईं। इसके बाद उन्होंने कालपी और ग्वालियर में अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखा।

रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से पूरे देश में स्वतंत्रता की नई चेतना उत्पन्न हुई है। उनका साहस भारतीयों को अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।

झाँसी की रणभूमि से फिलहाल इतना ही। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अन्य समाचारों के लिए हमारे साथ बने रहिए।

धन्यवाद!


‘हरबोलों’ और हमारी कहानी

“बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।”

‘हरबोला’ बुंदेलखंड क्षेत्र में रहने वाले लोकगायकों का एक समुदाय है जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की वीरतापूर्ण गाथा को अपने गीतों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का काम किया। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोकगायकों की एक लंबी और समृद्ध परंपरा रही है। इनके द्वारा गाए जाने वाले गीत सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों को संरक्षित करने का एक जीवंत माध्यम है। आपके क्षेत्र में अथवा आपकी भाषा में भी ऐसे लोकगायक और उनके द्वारा गाए जाने वाले देशभक्तिपूर्ण गीत अवश्य प्रचलित होंगे। ऐसे गीतों का एक संकलन तैयार कीजिए और कक्षा में साझा कीजिए।

उत्तर: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोकगायकों और वीरगाथाओं की समृद्ध परंपरा रही है। ये लोकगायक अपने गीतों के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं, वीरों के बलिदान और क्षेत्रीय संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखते हैं।

लोकगायन की कुछ प्रमुख परंपराएँ निम्नलिखित हैं—

बुंदेलखंड – यहाँ हरबोले रानी लक्ष्मीबाई, आल्हा और ऊदल जैसे वीरों की गाथाएँ गाते हैं। आल्हा गायन वीर रस से भरपूर होता है।

राजस्थान – यहाँ चारण और भाट लोकगायक महाराणा प्रताप, पाबूजी और अन्य वीरों की वीरता तथा बलिदान से संबंधित गीत सुनाते हैं।

उत्तर प्रदेश और बिहार – यहाँ बिरहा, आल्हा और अन्य लोकगीतों के माध्यम से वीरों, सामाजिक घटनाओं तथा ऐतिहासिक प्रसंगों का वर्णन किया जाता है।

पंजाब – यहाँ ढाडी गायन परंपरा के माध्यम से गुरुओं, योद्धाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के साहस की गाथाएँ प्रस्तुत की जाती हैं।

महाराष्ट्र – पोवाड़ा लोकगायन में छत्रपति शिवाजी महाराज तथा अन्य वीरों के साहस और संघर्ष का वर्णन किया जाता है।

हरियाणा – रागिनी और सांग के माध्यम से ऐतिहासिक तथा देशभक्तिपूर्ण घटनाएँ प्रस्तुत की जाती हैं।

विद्यार्थी देशभक्ति और वीरता से जुड़े निम्नलिखित गीतों तथा काव्य-रचनाओं का संकलन बना सकते हैं—

  • झाँसी की रानी

  • पुष्प की अभिलाषा

  • वीरों का कैसा हो वसंत

  • मेरा रंग दे बसंती चोला

  • कदम-कदम बढ़ाए जा

  • ऐ मेरे वतन के लोगो

गीतों का संकलन करते समय उनके रचनाकार, क्षेत्र, भाषा, मुख्य भाव और ऐतिहासिक संदर्भ की जानकारी भी लिखी जा सकती है।


भाषा संगम

“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी।”

नीचे ‘बहन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

बैनी, बहन (हिंदी); भगिनी, स्वसृः (संस्कृत); भैंण (पंजाबी); बहन, हमशीरा (उर्दू); बैनी (कश्मीरी); भेण (सिंधी); बहीण (मराठी); बहेन (गुजराती); भयण (कोंकणी); दीदी (नेपाली); बोन, भगिनी (बांग्ला); भनी बाइ बाइदेउ (असमिया); मचन, मनाओ (मणिपुरी); भउणी (ओड़िआ); अक्कॅ, चेल्लेलु (तेलुगू); तंगै, अक्का (तमिल) ; सहोदर, पेङल् (मलयालम); सोदरि, अक्क, तंगि (कन्नड़)।

इनके अतिरिक्त यदि आप ‘बहन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd-education.gov.in/lexicon-jsp

उत्तर:

अन्य भाषाओं में ‘बहन’ के लिए प्रयुक्त शब्द—

  • भोजपुरी – बहिन अथवा दीदी

  • मैथिली – बहिन अथवा दीदी

  • ब्रजभाषा – बहना अथवा बहिन

  • अवधी – बहिन

  • हरियाणवी – बेबे अथवा भाण

  • राजस्थानी – बैन अथवा भेण

“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी” का विभिन्न भाषाओं में रूप—

भोजपुरी – कानपुर के नाना के मुँहबोली बहिन ‘छबीली’ रहली।

मैथिली – कानपुरक नानाक मुँहबोली बहिन ‘छबीली’ छलि।

पंजाबी – ਕਾਨਪੁਰ ਦੇ ਨਾਨਾ ਦੀ ਮੂੰਹ-ਬੋਲੀ ਭੈਣ ‘ਛਬੀਲੀ’ ਸੀ।

कन्नड़ – ಕಾನ್ಪುರದ ನಾನಾರ ಆತ್ಮೀಯ ಸಹೋದರಿ ‘ಛಬೀಲಿ’ ಆಗಿದ್ದಳು।

विद्यार्थी इस वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखते समय परिवार के सदस्यों अथवा भाषा-शिक्षक की सहायता ले सकते हैं।


झरोखे से

कविता में लक्ष्मीबाई की दो सखियों ‘काना’ और ‘मंदरा’ का उल्लेख मिलता है जो युद्धक्षेत्र में अंत तक लक्ष्मीबाई के साथ रहीं। लक्ष्मीबाई की सहेलियों में ऐसी ही एक और वीरांगना का नाम आता है, जिनका नाम था ‘झलकारी बाई’। इन्होंने भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहुत ही वीरता के साथ अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। नीचे दिए गए लेख को पढ़कर आप 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के विषय में जान सकते हैं।

उत्तर:

झलकारी बाई

झलकारी बाई 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की एक साहसी वीरांगना थीं। वे सामान्य परिवार में जन्मी थीं, लेकिन अपने साहस, युद्ध-कौशल और देशभक्ति के कारण रानी लक्ष्मीबाई की विश्वसनीय सैनिक तथा सहयोगी बनीं।

झलकारी बाई का जन्म झाँसी के निकट भोजला गाँव में हुआ था। बचपन से ही वे साहसी और आत्मविश्वासी थीं। उन्होंने घुड़सवारी, तीरंदाजी, कुश्ती, निशानेबाजी और अस्त्र-शस्त्र चलाने का अभ्यास किया। उनके पति पूरन कोरी झाँसी की सेना में सैनिक थे।

झलकारी बाई की वीरता के विषय में जानकारी मिलने पर रानी लक्ष्मीबाई ने उन्हें अपनी महिला सेना ‘दुर्गा दल’ में सम्मिलित किया। शीघ्र ही वे इस दल की प्रमुख और रानी की भरोसेमंद सहयोगी बन गईं। उनका चेहरा और शारीरिक बनावट रानी लक्ष्मीबाई से काफी मिलती-जुलती बताई जाती है।

जब अंग्रेजी सेना ने झाँसी के किले को घेर लिया, तब झलकारी बाई और अन्य सैनिकों ने उसका कड़ा मुकाबला किया। संकट की स्थिति में उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई को अपने दत्तक पुत्र के साथ सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी।

रानी को समय देने के लिए झलकारी बाई ने स्वयं रानी लक्ष्मीबाई जैसा वेश धारण किया और अंग्रेजों के सामने पहुँच गईं। उनके समान रूप के कारण अंग्रेजी सैनिक भ्रमित हो गए। इस साहसिक योजना से रानी को किले से बाहर निकलने और संघर्ष जारी रखने का अवसर मिला।

झलकारी बाई ने अपने व्यक्तिगत दुखों की परवाह किए बिना अंग्रेजी सेना का सामना किया। उनकी वीरता, बुद्धिमत्ता और त्याग ने उन्हें बुंदेलखंड की लोकस्मृति में अमर बना दिया।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि देश की रक्षा और स्वतंत्रता के संघर्ष में सामान्य परिवार से आने वाला व्यक्ति भी अपने साहस और संकल्प से असाधारण योगदान दे सकता है। आज भी झलकारी बाई को साहस, नारी-शक्ति और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।


खोजबीन

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों तथा पुस्तकों के माध्यम से आप लक्ष्मीबाई तथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अन्य वीरांगनाओं और राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित बालिका कांति के अदम्य साहस के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं-

उत्तर: विद्यार्थी दिए गए इंटरनेट स्रोतों, विद्यालय के पुस्तकालय और इतिहास की पुस्तकों की सहायता से रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई तथा स्वतंत्रता संग्राम की अन्य वीरांगनाओं के विषय में जानकारी एकत्रित कर सकते हैं।

जानकारी एकत्रित करते समय निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है—

  • वीरांगना का नाम और जन्म-स्थान

  • उनके जीवन का संक्षिप्त परिचय

  • स्वतंत्रता संग्राम या सामाजिक कार्य में योगदान

  • उनके साहस और नेतृत्व से संबंधित प्रमुख घटना

  • समाज और देश पर उनके कार्यों का प्रभाव

  • उनके जीवन से मिलने वाली प्रेरणा

बालिका कांति के साहस के विषय में पढ़ते समय यह जानने का प्रयास करें कि उसने संकट की स्थिति में किस प्रकार धैर्य, सूझबूझ और साहस का परिचय दिया।

उपयोगी अध्ययन सामग्री—

  • राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त बालिका कांति से संबंधित समाचार-सामग्री

  • लक्ष्मीबाई और स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं से संबंधित शैक्षिक वीडियो

  • ‘भारत की महान नारियाँ’ श्रृंखला की पुस्तकें, प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली

अध्ययन के बाद विद्यार्थी किसी एक वीरांगना का संक्षिप्त जीवन-परिचय, पोस्टर, भाषण अथवा प्रस्तुति तैयार करके कक्षा में प्रस्तुत कर सकते हैं।


Understanding Rani Lakshmibai's Valour in Chapter 11 झाँसी की रानी

The poem traces Lakshmibai's journey from the spirited child 'Chhabili', skilled in horse-riding and swordplay, to the fearless queen who fought the British at Jhansi, Kalpi, and Gwalior. Subhadra Kumari Chauhan presents her as 'avtari' - divine in courage. Understanding this timeline helps students answer sequence-based and value-based questions. Pair these solutions with Vedantu's Chapter 11 Revision Notes for complete preparation.


How to Prepare with Vedantu’s NCERT Solutions Chapter 11 झाँसी की रानी for Class 9 Hindi Exams?

Questions from this poem mostly cover the bhaavarth of key lines, figures of speech (anupras, rupak, manvikaran), the timeline of Lakshmibai's life, and historical references like the Doctrine of Lapse and the 1857 revolt. While answering, quoting lines from the poem and explaining difficult words earns marks. The refrain "खूब लड़ी मर्दानी..." is the most frequently asked extract.


CBSE Class 9 Hindi Chapter 11 Other Study Materials

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Important Links for Chapter 11 Class 9 Hindi

1

Class 9 Jhansi Ki Rani Important Questions

2

Class 9 Jhansi Ki Rani Revision Notes



Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga

Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.


S.No

NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF

1

Chapter 1 - Do Bailon Ki Katha Solutions

2

Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions

3

Chapter 3 - Samvaadheen Solutions

4

Chapter 4 - Aisi Bhi Baatein Hoti Hein Solutions

5

Chapter 5 -  Aakhri Chataan Tak Solutions

6

Chapter 6 - Reedh Ki Haddi Solutions

7

Chapter 7 - Main Aur Mera Desh Solutions

8

Chapter 8 - Pad Solutions

9

Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions

10

Chapter 10 - Bharati Jai Vijay Kare Solutions

11

Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions



Additional Study Materials for Class 9 Hindi

FAQs on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 Jhansi Ki Rani 2026-27

1. CBSE Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 झाँसी की रानी कविता की कवयित्री कौन हैं और कविता किस पर आधारित है?

झाँसी की रानी कविता की कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। यह एक वीर-रस से भरी कथात्मक कविता है, जो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, साहस और बलिदान पर आधारित है। इसकी प्रसिद्ध पंक्ति है - "खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।"

2. लक्ष्मीबाई को 'अवतारी' क्यों कहा गया है?

रानी लक्ष्मीबाई को उनके असाधारण साहस, वीरता, त्याग और देशभक्ति के कारण 'अवतारी' कहा गया है। बहुत कम आयु में उन्होंने शक्तिशाली अंग्रेजी सेना से युद्ध किया और अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बाँधकर रणभूमि में लड़ीं। उनका साहस सामान्य मनुष्य से कहीं अधिक था, इसलिए कवयित्री ने उन्हें देवी दुर्गा के समान 'अवतारी' कहा है।

3. Are these NCERT Solutions for Hindi Class 9 Chapter 11 free and based on the latest 2026-27 syllabus?

Yes. Vedantu's solutions are completely free and based on the new NCERT Ganga textbook and the latest CBSE 2026-27 syllabus. They cover all exercise question-answers, the bhaavarth, figures of speech, idioms, and grammar, prepared by expert Hindi teachers.

4. Why is झाँसी की रानी called a narrative poem (कथात्मक कविता) in CBSE Class 9 Hindi?

The poem is called a narrative poem because it combines poetry with storytelling, presenting events in sequence. It traces Rani Lakshmibai's life from her childhood as 'Chhabili', through her marriage and the death of King Gangadhar Rao, to the 1857 revolt and her heroic death in battle.

5. What is the meaning of the famous line "खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी"?

This line means that Rani Lakshmibai fought as bravely and fiercely as a warrior. It is the poem's refrain, repeated to emphasise her exceptional courage in the 1857 struggle. The poet heard her story from the Bundelkhand folk singers (हरबोले), which the opening line acknowledges.

6. Is Chapter 11 झाँसी की रानी important for Class 9 Hindi exams?

Yes. झाँसी की रानी is a high-weightage poem, with questions on the bhaavarth, figures of speech, the timeline of Lakshmibai's life, and historical references like the Doctrine of Lapse and the 1857 revolt. Its famous lines also appear frequently in extract-based and value-based questions.

7. What does "महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी" signify in NCERT Solutions for Class 9 Hindi?

This line signifies the unity of all sections of society in the 1857 revolt. Kings, queens, and nobles fought alongside farmers, soldiers, and common people against British rule. It shows the freedom struggle was not limited to palaces but spread to the huts of ordinary citizens.

8. What was the Doctrine of Lapse mentioned in the Chapter 11 poem from Class 9 Hindi?

The Doctrine of Lapse (हड़प नीति) was Lord Dalhousie's policy under which the British refused to accept an adopted son as a legal heir. If a ruler died without a natural heir, the British annexed the state. This is why they refused to recognise Rani Lakshmibai's adopted son and tried to seize Jhansi.

9. What figures of speech are used in Chapter 11 झाँसी की रानी?

The poem mainly uses anupras (alliteration), rupak (metaphor), and manvikaran (personification). The repeated refrain and vivid descriptions create a veer-ras (heroic) tone. The solutions explain each figure of speech with examples from the poem.

10. Where can I download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 झाँसी की रानी PDF for free?

You can download the FREE PDF of NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 झाँसी की रानी from Vedantu. The PDF includes detailed answers to all exercises - रचना से संवाद, विधा से संवाद, विषयों से संवाद, and भाषा से संवाद - and can be used offline for revision anytime.