Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? Questions with Detailed Answers FREE PDF
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Class 9 Hindi NCERT Solutions Chapter 2 क्या लिखूँ?
अभ्यास (पृष्ठ 35-43)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत-आधारित लेखन का समर्थन करना
उत्तर (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
क्योंकि ए. जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध का विषय केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम है। निबंध में वास्तविक महत्त्व लेखक के अनुभवों, भावनाओं और अभिव्यक्ति का होता है।
प्रश्न 2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है…. उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
क्योंकि मानटेन ने अपने देखे, सुने और अनुभव किए हुए विषयों को स्वतंत्र रूप से निबंधों में प्रस्तुत किया। उनके लेखन में बनावटीपन के स्थान पर सच्ची अनुभूति और स्वाभाविक अभिव्यक्ति दिखाई देती है।
प्रश्न 3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल….. वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव
युवा अपनी इच्छाओं और सपनों के कारण भविष्य को उज्ज्वल देखते हैं, जबकि वृद्ध अपने अनुभवों और पुरानी स्मृतियों के कारण अतीत को अधिक सुखद मानते हैं।
प्रश्न 4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता-लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
अमीर खुसरो की रचना का उदाहरण यह बताने के लिए दिया गया है कि एक कुशल रचनाकार अलग-अलग और असंबंधित विषयों को भी अपनी प्रतिभा से एक रचना में जोड़ सकता है।
प्रश्न 5. निबंध में समाज सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव है।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन है।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
मानव समाज निरंतर बदलता रहता है। प्रत्येक युग में नई समस्याएँ और आवश्यकताएँ उत्पन्न होती हैं, इसलिए समाज-सुधार की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1. निबंध-लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर: ए. जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखना एक विशेष मानसिक अवस्था का परिणाम है। जब लेखक के मन में विचार और भाव स्वतः उत्पन्न होते हैं, तब वह किसी भी सामान्य विषय को आधार बनाकर अपनी अनुभूतियाँ व्यक्त कर सकता है। उनके अनुसार विषय केवल एक खूँटी है, जबकि लेखक के विचार और भाव असली हैट के समान हैं।
इसके विपरीत पाठ के लेखक को निबंध लिखने के लिए बहुत सोच-विचार और परिश्रम करना पड़ता है। उसके मन में विचार अपने-आप नहीं आते। उसे विषय चुनने, सामग्री जुटाने और रूपरेखा बनाने में कठिनाई अनुभव होती है। इस प्रकार गार्डिनर निबंध-लेखन को स्वाभाविक अभिव्यक्ति मानते हैं, जबकि लेखक इसे मेहनत और तैयारी से जुड़ा कार्य मानता है।
प्रश्न 2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर: युवा और वृद्ध दोनों वर्तमान से असंतुष्ट हो सकते हैं, लेकिन उनकी सोच अलग होती है। युवा भविष्य के लिए बड़े सपने और नई योजनाएँ रखते हैं। वे समाज में तेजी से बदलाव चाहते हैं और वर्तमान परिस्थितियों को अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं पाते।
वृद्ध अपने लंबे अनुभव और पुरानी स्मृतियों से जुड़े रहते हैं। उन्हें अपने समय की परंपराएँ, जीवनशैली और मूल्य अधिक अच्छे लगते हैं। बदलती तकनीक, सामाजिक व्यवहार और नई सोच उन्हें कई बार असहज करती है।
युवा परिवर्तन और नवीनता को महत्त्व देते हैं, जबकि वृद्ध स्थिरता, अनुभव और परंपरा को प्राथमिकता देते हैं। यही पीढ़ीगत अंतर उनकी असंतुष्टि का मुख्य कारण बनता है।
प्रश्न 3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
उत्तर: नमिता लेखक से ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ विषय पर निबंध लिखवाना चाहती थी। अमिता ने ‘समाज-सुधार’ विषय पर निबंध लिखने का आग्रह किया।
इन दोनों विषयों पर लिखने में लेखक को कई कठिनाइयाँ आईं। उसे विषयों के लिए नई और पर्याप्त सामग्री खोजनी थी। दोनों विषयों की प्रकृति भी अलग थी, इसलिए उनके लिए अलग रूपरेखा और उदाहरण आवश्यक थे। लेखक के पास समय बहुत कम था और उसे दो घंटे में दोनों निबंध तैयार करने थे। उसे उपयुक्त शीर्षक, विचारों का क्रम और प्रभावशाली भाषा चुनने में भी कठिनाई हो रही थी। इस कारण वह उलझन में पड़ गया।
प्रश्न 4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर: निबंधशास्त्र के आचार्यों के अनुसार एक अच्छे निबंध में लेखक के विचार, अनुभव, भावनाएँ और व्यक्तित्व स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। भाषा सरल, स्वाभाविक और प्रभावशाली होनी चाहिए। निबंध में विचारों का क्रम बना रहना चाहिए और अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए।
निबंध लिखने से पहले मैं निम्नलिखित तैयारी करता हूँ—
विषय का अर्थ और उद्देश्य स्पष्ट रूप से समझता हूँ।
विषय से संबंधित मुख्य बिंदु और उदाहरण एकत्र करता हूँ।
भूमिका, मुख्य भाग और उपसंहार की रूपरेखा बनाता हूँ।
विचारों को उचित क्रम में व्यवस्थित करता हूँ।
सरल भाषा, सूक्तियों, लोकोक्तियों और उपयुक्त उदाहरणों का प्रयोग करता हूँ।
निबंध पूरा होने के बाद भाषा और वर्तनी की जाँच करता हूँ।
इस तैयारी से निबंध विषय-केंद्रित, क्रमबद्ध और प्रभावशाली बनता है।
प्रश्न 5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर: देखना, सुनना और अनुभव करना निबंध-लेखन को वास्तविक और प्रभावशाली बनाता है। जब लेखक अपने निजी अनुभवों और आसपास की घटनाओं को आधार बनाकर लिखता है, तो उसके विचार स्वाभाविक लगते हैं।
प्रत्यक्ष अनुभव से लेखक को विषय की गहरी समझ मिलती है। सुनी और देखी हुई बातों से उसे उदाहरण तथा तथ्य प्राप्त होते हैं। इससे निबंध केवल जानकारी का संग्रह न रहकर जीवंत अभिव्यक्ति बन जाता है। पाठक भी लेखक की भावनाओं और विचारों से आसानी से जुड़ पाता है। इसलिए अनुभव मौलिक, विश्वसनीय और रोचक निबंध का महत्त्वपूर्ण आधार है।
विधा से संवाद
निबंध लिखने की कला
‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘बाँधना’ (नि + बंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं।
शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है। तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?
उत्तर: निबंध – जीवन में अनुशासन और उसका महत्त्व
भूमिका
अनुशासन का अर्थ है नियमों का पालन करते हुए अपने समय, व्यवहार और कार्यों को व्यवस्थित करना। यह व्यक्ति को सही दिशा देता है और उसके जीवन को सफल बनाने में सहायता करता है। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का विशेष महत्त्व है।
अनुशासन की प्रेरणा
हमारे आसपास अनेक लोग नियमितता और आत्म-नियंत्रण के कारण सफलता प्राप्त करते हैं। खिलाड़ी प्रतिदिन अभ्यास करते हैं, विद्यार्थी समय पर पढ़ाई करते हैं और वैज्ञानिक अपने कार्य में लगातार परिश्रम करते हैं। इन सभी की सफलता के पीछे अनुशासन की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
विद्यार्थी जीवन में अनुशासन
एक अनुशासित विद्यार्थी समय पर विद्यालय पहुँचता है, नियमित गृहकार्य करता है और अपने शिक्षकों तथा सहपाठियों का सम्मान करता है। वह समय का सदुपयोग करता है और अपने लक्ष्य के अनुसार अध्ययन करता है। इससे उसमें आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
अनुशासन और सफलता
सफलता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती। इसके लिए निरंतर अभ्यास, समय-पालन और धैर्य आवश्यक है। महान खिलाड़ी, कलाकार और वैज्ञानिक वर्षों तक अनुशासित प्रयास करते हैं। नियमित छोटे कदम ही व्यक्ति को बड़ी मंजिल तक पहुँचाते हैं।
अनुशासनहीनता के नुकसान
अनुशासन की कमी से समय नष्ट होता है और कार्य अधूरे रह जाते हैं। अनुशासनहीन व्यक्ति लक्ष्य से भटक सकता है और उसे बाद में पछताना पड़ सकता है। इसलिए स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और आत्म-नियंत्रण भी आवश्यक है।
उपसंहार
अनुशासन केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और देश की प्रगति का आधार भी है। अनुशासित नागरिक अपने कर्तव्यों को समझते हैं और समाज के विकास में योगदान देते हैं। अतः हमें अनुशासन को अपने जीवन की स्थायी आदत बनाना चाहिए।
निबंध-लेखन की मेरी रूपरेखा
विषय का चयन → विचारों का संग्रह → मुख्य बिंदुओं की सूची → भूमिका → विषय-विस्तार → उदाहरण → उपसंहार → पुनरीक्षण
यह तरीका बेहतर है क्योंकि इससे विचार क्रमबद्ध रहते हैं, विषय से भटकाव नहीं होता और निबंध को स्पष्ट तथा प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।
भाव विस्तार
“तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक”
युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश की भावना प्रबल होती है। वह किसी भी समस्या के समाधान के लिए बैठकर बातचीत करने के बजाय उस पर त्वरित निर्णय लेना चाहते हैं जबकि वृद्ध पीढ़ी किसी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है।
पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव विस्तार कीजिए-
“जो तरुण संसार के जीवन संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
उत्तर: जिन युवाओं ने अभी जीवन की कठिनाइयों, जिम्मेदारियों और संघर्षों का सामना नहीं किया है, उन्हें संसार बहुत सुंदर और आकर्षक दिखाई देता है। वे भविष्य के सपनों और कल्पनाओं से भरे रहते हैं। उन्हें लगता है कि सफलता आसानी से प्राप्त की जा सकती है। परंतु अनुभव बढ़ने पर उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों का ज्ञान होता है। इसलिए कम अनुभव के कारण संसार का चित्र युवाओं को अधिक मनमोहक प्रतीत होता है।
“मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
उत्तर: मानव समाज निरंतर परिवर्तनशील है। प्रत्येक युग में परिस्थितियों के अनुसार नई समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। सामाजिक कुरीतियाँ, असमानता, अशिक्षा और अन्याय को दूर करने के लिए समय-समय पर सुधारों की आवश्यकता पड़ती है। जो व्यवस्था किसी समय उपयोगी होती है, वह बदलती परिस्थितियों में पुरानी हो सकती है। इसलिए समाज के स्वस्थ विकास के लिए सुधारों की प्रक्रिया हमेशा चलती रहती है।
“आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
उत्तर: समय के साथ प्रत्येक युवा वृद्ध होता है। आज के युवाओं को वर्तमान साधारण लग सकता है, लेकिन भविष्य में यही समय उनकी स्मृतियों का महत्त्वपूर्ण भाग बन जाएगा। वृद्धावस्था में वे अपने युवाकाल की उपलब्धियों, अनुभवों और सुखद घटनाओं को गौरव के साथ याद करेंगे। यह कथन बताता है कि समय बदलता रहता है और प्रत्येक पीढ़ी अपने अतीत से भावनात्मक रूप से जुड़ जाती है।
“निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
उत्तर: अच्छे लेखन की पहचान केवल उसके विस्तार से नहीं, बल्कि विचारों की स्पष्टता और प्रभाव से होती है। छोटे निबंध में विषय को संक्षिप्त, क्रमबद्ध और सीधे रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अनावश्यक विस्तार पाठक की रुचि कम कर सकता है। यदि कम शब्दों में पूरा और प्रभावशाली विचार व्यक्त हो जाए, तो निबंध अधिक रोचक और याद रखने योग्य बनता है।
मेरा अनुभव
इस निबंध में लेखक को दो विषयों (‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’) पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
उत्तर: मुझे उन विषयों पर लिखना आसान लगता है जो मेरे दैनिक जीवन और अनुभवों से जुड़े होते हैं। ‘मेरा विद्यालय’, ‘मेरा प्रिय खेल’, ‘समय का महत्त्व’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ जैसे विषयों पर अपने अनुभवों तथा आसपास की घटनाओं के आधार पर विचार लिखे जा सकते हैं।
इसके विपरीत ऐतिहासिक, वैज्ञानिक या गहरे सामाजिक विषयों पर लिखना अपेक्षाकृत कठिन लगता है। इन विषयों के लिए सही जानकारी, तथ्य, उदाहरण और अध्ययन की आवश्यकता होती है। यदि विषय का पर्याप्त ज्ञान न हो, तो विचारों को व्यवस्थित करना कठिन हो जाता है।
मैंने अनुभव किया है कि नियमित पठन, रूपरेखा तैयार करने और लेखन-अभ्यास से कठिन विषयों पर भी अच्छा निबंध लिखा जा सकता है।
विषयों से संवाद
प्रश्न 1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
उत्तर:
गौतम बुद्ध
गौतम बुद्ध ने करुणा, अहिंसा, मध्यम मार्ग और मानव समानता का संदेश दिया। उन्होंने जाति और कर्मकांड से ऊपर उठकर सदाचार तथा आत्मज्ञान को महत्त्व दिया। उनके अष्टांगिक मार्ग में सही विचार, सही आचरण और संतुलित जीवन पर बल दिया गया है।
महावीर स्वामी
महावीर स्वामी ने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों का प्रचार किया। उन्होंने प्रत्येक जीव के प्रति करुणा रखने और इच्छाओं पर नियंत्रण करने की शिक्षा दी। उनके विचारों ने सादगी, आत्म-अनुशासन और नैतिक जीवन को बढ़ावा दिया।
नागार्जुन
नागार्जुन प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक थे। उन्होंने मध्यमक दर्शन और शून्यता के सिद्धांत की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि संसार की वस्तुएँ स्थायी नहीं हैं और सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं। उनके विचारों ने बौद्ध दर्शन को तर्कपूर्ण और व्यापक रूप दिया।
आदि शंकराचार्य
आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और आत्मा तथा परमात्मा की एकता का सिद्धांत प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा करके दार्शनिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया। उन्होंने चार प्रमुख मठों की स्थापना भी की।
कबीर
संत कबीर ने जाति-पाँति, धार्मिक आडंबर और पाखंड का विरोध किया। उन्होंने सरल भाषा में प्रेम, भक्ति, समानता और मानवता का संदेश दिया। उनके दोहे आज भी सामाजिक सद्भाव और आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हैं।
गुरु नानक देव
गुरु नानक देव ने एक ईश्वर, समानता, सेवा और ईमानदार परिश्रम का संदेश दिया। उन्होंने जातिगत भेदभाव तथा सामाजिक अन्याय का विरोध किया। लंगर की परंपरा के माध्यम से उन्होंने समानता और सामूहिक सेवा की भावना को बढ़ावा दिया।
प्रश्न 2. निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर: समाज में शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण, समानता और दिव्यांगजन के कल्याण के लिए अनेक संस्थाएँ कार्य कर रही हैं। कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं—
नारायण सेवा संस्थान
यह संस्था दिव्यांगजन और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के उपचार तथा पुनर्वास के लिए कार्य करती है। संस्था चिकित्सा सहायता, कृत्रिम अंग, कौशल प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता से जुड़ी सेवाएँ प्रदान करती है।
सेल्फ-एम्प्लॉयड विमेन्स एसोसिएशन असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को संगठित करती है। यह महिलाओं की आय, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए कार्य करती है।
ऊर्जा और संसाधन संस्थान
यह संस्था ऊर्जा संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से संबंधित शोध तथा जागरूकता का कार्य करती है।
विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र
यह संस्था प्रदूषण, स्वच्छ जल, कचरा प्रबंधन, स्वास्थ्य और टिकाऊ विकास से जुड़े विषयों पर शोध करती है तथा लोगों में पर्यावरण संबंधी जागरूकता फैलाती है।
नवदान्य
यह संगठन जैविक खेती, देशी बीजों के संरक्षण और किसानों के अधिकारों के लिए कार्य करता है। यह टिकाऊ कृषि और जैव विविधता को बढ़ावा देता है।
इन संस्थाओं के प्रयासों से समाज में समान अवसर, जागरूकता और जिम्मेदार विकास को प्रोत्साहन मिलता है।
प्रश्न 3. आपको ‘समाज-सुधार’ करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर: यदि मुझे समाज-सुधार का अवसर मिले, तो मैं छोटे लेकिन उपयोगी कार्यों से शुरुआत करूँगा।
शिक्षा का प्रसार
मैं अपने आसपास उन बच्चों की सहायता करना चाहूँगा जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से नियमित पढ़ाई नहीं कर पाते। उन्हें पुस्तकें उपलब्ध कराने, पढ़ाने और विद्यालय जाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करूँगा।
स्वच्छता और स्वास्थ्य
लोगों को स्वच्छ जल, संतुलित भोजन, व्यक्तिगत सफाई और कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूक करूँगा। गीले और सूखे कचरे को अलग रखने तथा एकल-उपयोग प्लास्टिक कम करने की आदत को बढ़ावा दूँगा।
पर्यावरण संरक्षण
वृक्षारोपण, वर्षा जल-संचयन और जैविक खाद बनाने जैसी गतिविधियों में भाग लूँगा। विद्यालय के पर्यावरण क्लब के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाऊँगा।
समानता और सम्मान
जाति, लिंग, आर्थिक स्थिति या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव का विरोध करूँगा। सभी लोगों के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करने का संदेश दूँगा।
इन कार्यों को विद्यालय की गतिविधियों, पोस्टर, भाषण, निबंध प्रतियोगिता, स्काउट-गाइड और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है।
प्रश्न 4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर: भारतीय ज्ञान साहित्य मनुष्य को संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, रामायण, महाभारत, पंचतंत्र, हितोपदेश, अर्थशास्त्र और योगसूत्र जैसे ग्रंथ जीवन के अलग-अलग पक्षों पर प्रकाश डालते हैं।
नैतिक जीवन में सत्य, दया, कर्तव्य, ईमानदारी और न्याय का महत्त्व बताया गया है। आध्यात्मिक जीवन आत्मचिंतन, मन की शांति और इच्छाओं पर नियंत्रण सिखाता है। व्यावहारिक जीवन में सही निर्णय, समय का उपयोग, सामाजिक जिम्मेदारी और कठिन परिस्थितियों का सामना करना शामिल है।
इन तीनों पक्षों का संतुलन व्यक्ति को केवल सफल ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार भी बनाता है। विद्यार्थी इन शिक्षाओं को अपनाकर पढ़ाई, स्वास्थ्य, संबंधों और सामाजिक कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं।
सृजन
प्रश्न 1. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।
आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी- ‘आम के आम गुठलियों के दाम’। अब आप इस लोकोक्ति और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास’ विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
उत्तर:
लेख
आम के आम गुठलियों के दाम और जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास
‘आम के आम और गुठलियों के दाम’ लोकोक्ति का अर्थ है कि एक ही कार्य से दोहरा लाभ प्राप्त हो जाए। जैविक खाद के निर्माण में यह बात पूरी तरह लागू होती है। घर से निकलने वाले फल-सब्जियों के छिलके, सूखे पत्ते, गोबर और अन्य जैविक कचरे को फेंकने के बजाय खाद बनाने में उपयोग किया जा सकता है।
आम खाने के बाद उसकी गुठलियों को प्रायः बेकार समझकर फेंक दिया जाता है। इन्हें अन्य जैविक कचरे के साथ कम्पोस्ट में मिलाया जा सकता है। इससे कचरे की मात्रा कम होती है और पौधों के लिए उपयोगी खाद भी तैयार हो जाती है। जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है तथा रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करती है।
हमें अपने घर और विद्यालय में गीले तथा सूखे कचरे को अलग करना चाहिए और जैविक कचरे से खाद बनाने का प्रयास करना चाहिए। इस प्रकार पर्यावरण की रक्षा भी होगी और बागवानी के लिए पौष्टिक खाद भी मिलेगी। यही ‘आम के आम और गुठलियों के दाम’ का सही उदाहरण है।
प्रश्न 2. “जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।”
आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर:
डायरी लेखन
दिनांक: 10 अप्रैल, 2027
आज मैंने ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ लोकोक्ति का वास्तविक अर्थ समझा। कुछ समय पहले मेरे क्षेत्र में एक नया प्रशिक्षण संस्थान खुला था। उसके बड़े-बड़े विज्ञापनों, आकर्षक भवन और सफलता के दावों को देखकर मुझे लगा कि वहाँ की पढ़ाई बहुत अच्छी होगी।
मैंने उस संस्थान में प्रवेश ले लिया। शुरुआत में उसकी सजावट और सुविधाएँ देखकर मैं प्रभावित हुआ, लेकिन कुछ दिनों बाद मेरा अनुभव बदल गया। कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या बहुत अधिक थी और शिक्षकों के पास प्रत्येक विद्यार्थी की समस्या सुनने का समय नहीं था। विज्ञापनों में किए गए कई दावे भी वास्तविकता से अलग लगे।
इस अनुभव से मैंने सीखा कि किसी संस्था या व्यक्ति के बारे में केवल बाहरी दिखावे और प्रचार के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। सही जानकारी प्राप्त करके और प्रत्यक्ष अनुभव को समझकर ही कोई निर्णय करना उचित होता है।
– एक विद्यार्थी
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
समास
“मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा”
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों ‘निबंध’ और ‘रचना’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है- निबंध की रचना।
उत्तर: समास का अर्थ है संक्षिप्त करना। जब दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया और संक्षिप्त शब्द बनाते हैं, तो उसे समास कहते हैं।
जैसे:
गंगा का जल = गंगाजल
देश के प्रति भक्ति = देशभक्ति
निबंध की रचना = निबंध-रचना
समास के पहले शब्द को पूर्वपद और दूसरे शब्द को उत्तरपद कहते हैं। समास से बने पूरे शब्द को समस्त पद कहा जाता है।
उदाहरण:
गंगाजल में ‘गंगा’ पूर्वपद और ‘जल’ उत्तरपद है।
देशभक्ति में ‘देश’ पूर्वपद और ‘भक्ति’ उत्तरपद है।
समस्त पद को अलग-अलग करके उसका पूरा अर्थ बताने की प्रक्रिया को समास-विग्रह कहते हैं।
जैसे:
गंगाजल = गंगा का जल
समाज-सुधार = समाज का सुधार
समास के छह प्रमुख भेद हैं:
अव्ययीभाव समास
तत्पुरुष समास
कर्मधारय समास
द्विगु समास
द्वंद्व समास
बहुव्रीहि समास
प्रश्न 2. निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। आपकी समझ के लिए एक उदाहरण तालिका में दिया गया है। पाठ से अन्य उदाहरण चुनकर अपनी लेखन- पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
सामासिक शब्द | समास-विग्रह | समास का नाम |
निबंध-रचना | निबंध की रचना | तत्पुरुष समास |
समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
जीवन-संग्राम | जीवन का संग्राम | तत्पुरुष समास |
अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष समास |
निबंध-लेखन | निबंध का लेखन | तत्पुरुष समास |
सुख-दुख | सुख और दुख | द्वंद्व समास |
तरुण-वृद्ध | तरुण और वृद्ध | द्वंद्व समास |
देश-काल | देश और काल | द्वंद्व समास |
आत्मविश्वास | स्वयं पर विश्वास | तत्पुरुष समास |
मनमोहक | मन को मोहने वाला | तत्पुरुष समास |
उपसर्ग एवं प्रत्यय
“सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है।”
“समाज-सुधार की चर्चा अनादि काल से लेकर आज तक होती आ रही है।”
दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। दोनों रेखांकित शब्दों में मूल शब्द के पहले ‘दुर्’ उपसर्ग और ‘आदि’ के पहले ‘अन’ उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। उपसर्ग भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता है। ये शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को देखिए-
“आज तक कितने ही सुधारक हो गए हैं।”
“लेखों का शीर्षक बनाने में ही सबसे अधिक कठिनाई होती है।”
रेखांकित शब्दों में मूल शब्द ‘सुधार’ के बाद में ‘क’ प्रत्यय और ‘कठिन’ शब्द के बाद में ‘आई’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। प्रत्यय भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं। जिनका प्रयोग स्वतंत्र रूप में नहीं होता और जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
प्रश्न 1. निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: ‘क्या लिखूँ?’ पाठ में प्रयुक्त कुछ उपसर्ग-युक्त शब्द:
उपसर्ग | मूल शब्द | नया शब्द |
दुर् | बोध | दुर्बोध |
अन् | आदि | अनादि |
अ | संतोष | असंतोष |
अ | स्पष्ट | अस्पष्ट |
प्र | सिद्ध | प्रसिद्ध |
सु | हावना | सुहावना |
अनु | भव | अनुभव |
परि | वर्तन | परिवर्तन |
पाठ में प्रयुक्त कुछ प्रत्यय-युक्त शब्द:
मूल शब्द | प्रत्यय | नया शब्द |
सुधार | क | सुधारक |
कठिन | आई | कठिनाई |
स्पष्ट | ता | स्पष्टता |
मधुर | ता | मधुरता |
सुंदर | ता | सुंदरता |
प्रसन्न | ता | प्रसन्नता |
लेख | क | लेखक |
रचना | कार | रचनाकार |
प्रश्न 2. नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए-
निबंध लिखना बड़ी ………………………….. (कठिन….) की बात है।
वर्तमान से दोनों को ……………………… (……..संतोष) होता है।
वाक्यों में कुछ ……………………. (…..स्पष्ट…..) भी चाहिए, क्योंकि यह …………………. (…..स्पष्ट…..) या ………………………. (……बोध……) गांभीर्य ला देती है।
उत्तर:
कठिनाई
असंतोष
अस्पष्टता, अस्पष्टता, दुर्बोधता
पूर्ण वाक्य:
निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है।
वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है।
वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है।
प्रश्न 3. नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।
उदाहरण – मधुर → मधुरता, माधुर्य, सुमधुर
उत्तर:
सुधार → सुधारक, सुधारवादी, सुधारना
सुंदर → सुंदरता, सौंदर्य, अतिसुंदर
गति → प्रगति, दुर्गति, सद्गति, गतिशील, गतिहीन
समाज → सामाजिक, असामाजिक, समाजसेवी, समाज-सुधार
ज्ञान → ज्ञानी, अज्ञान, ज्ञानवान
स्पष्ट → स्पष्टता, अस्पष्ट, सुस्पष्ट
लेख → लेखक, लेखन, आलेख
विचार → विचारक, विचारशील, सुविचार
भाव एक शब्द अनेक
इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने मधुर मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पाठ में प्रयुक्त मिलते-जुलते अर्थ वाले कुछ शब्द और उनके वाक्य-प्रयोग इस प्रकार हैं:
उमंग – स्फूर्ति – आवेग
उमंग – त्योहार आते ही बच्चों का मन उमंग से भर गया।
स्फूर्ति – सुबह व्यायाम करने से शरीर में स्फूर्ति आती है।
आवेग – उसने आवेग में आकर बिना सोचे उत्तर दे दिया।
खुशी – आनंद – प्रसन्नता
खुशी – परीक्षा में अच्छे अंक आने पर मुझे बहुत खुशी हुई।
आनंद – वर्षा में खेलकर बच्चों को बहुत आनंद मिला।
प्रसन्नता – विद्यार्थियों की सफलता देखकर शिक्षक को प्रसन्नता हुई।
सुहावना – मधुर – मनमोहक
सुहावना – आज सुबह का मौसम बहुत सुहावना है।
मधुर – गायिका की मधुर आवाज ने सभी को प्रभावित किया।
मनमोहक – पहाड़ों का मनमोहक दृश्य सबको आकर्षित कर रहा था।
संकोच – आशंका – विषाद
संकोच – नए विद्यार्थियों से बात करने में उसे संकोच हो रहा था।
आशंका – वर्षा के कारण मैच रद्द होने की आशंका है।
विषाद – असफलता के समाचार से उसका मन विषाद से भर गया।
ध्वनि – कलरव – संगीत
ध्वनि – मंदिर की घंटियों की ध्वनि दूर तक सुनाई दी।
कलरव – सुबह पक्षियों का कलरव मन को प्रसन्न करता है।
संगीत – मधुर संगीत सुनकर मन शांत हो गया।
विचार – मनन – चिंतन
विचार – हमें निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों पर विचार करना चाहिए।
मनन – महापुरुषों के विचारों पर मनन करने से ज्ञान बढ़ता है।
चिंतन – पर्यावरण संरक्षण पर गंभीर चिंतन आवश्यक है।
गतिविधियाँ
प्रश्न 1. “खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।”
पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
उत्तर: अमीर खुसरो से संबंधित कुछ लोकप्रिय पहेलियाँ, मुकरियाँ और अनमेलियाँ निम्नलिखित हैं:
पहेली 1
एक थाल मोतियों से भरा,
सबके सिर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे,
मोती उससे एक न गिरे।
उत्तर – आकाश और तारे
पहेली 2
एक जानवर रंग-रंगीला,
बिन मारे वह रोवे।
उसके सिर पर तीन तिलक हैं,
बिन बताए सोवे।
उत्तर – मोर
मुकरी 1
रात समय वह मेरे आवे,
भोर भये वह घर उठि जावे।
यह अचरज है सबसे न्यारा,
ऐ सखि साजन? ना सखि तारा!
उत्तर – तारा
मुकरी 2
दाँत से दाँत बजे तो ताड़ा,
सारा तन काँपे बेचारा।
ऐ सखि साजन? ना सखि जाड़ा!
उत्तर – जाड़ा
अनमेली
पथिक प्यासा क्यों?
गधा उदास क्यों?
उत्तर – लोटा न था।
विद्यार्थी शिक्षक या पुस्तकालय की सहायता से अमीर खुसरो की अन्य पहेलियों और मुकरियों का भी संकलन कर सकते हैं।
प्रश्न 2. कक्षा में ‘युवा और वृद्ध-दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’ पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।
उत्तर: वाद-विवाद
विषय – युवा और वृद्ध: दो पीढ़ियों के बीच अंतर
नियम:
प्रत्येक वक्ता को दो मिनट का समय दिया जाएगा।
सभी वक्ता शिष्ट और सरल भाषा का प्रयोग करेंगे।
पहले विषय के पक्ष में और फिर विपक्ष में विचार रखे जाएँगे।
किसी व्यक्ति की भावनाओं या आयु का मजाक नहीं उड़ाया जाएगा।
अंत में निर्णायक मंडल परिणाम घोषित करेगा।
संचालक:
आदरणीय शिक्षकगण और प्रिय सहपाठियो! आज की वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय है—‘युवा और वृद्ध: दो पीढ़ियों के बीच अंतर’। अब मैं विषय के पक्ष में विचार रखने वाले वक्ता को आमंत्रित करता हूँ।
पक्ष में वक्तव्य:
युवा और वृद्ध पीढ़ी के विचारों में अंतर स्वाभाविक है। युवा नई तकनीक, परिवर्तन और नए प्रयोगों को शीघ्र अपनाते हैं। वे भविष्य को बेहतर बनाने के लिए नए विचार प्रस्तुत करते हैं। दूसरी ओर, वृद्ध लोगों के पास जीवन का लंबा अनुभव होता है। उनका मार्गदर्शन युवाओं को गलतियों से बचा सकता है।
यदि युवाओं की ऊर्जा और वृद्धों का अनुभव मिल जाए, तो समाज अधिक तेजी से प्रगति कर सकता है। इसलिए पीढ़ीगत अंतर को समस्या नहीं, बल्कि एक-दूसरे से सीखने का अवसर मानना चाहिए।
विपक्ष में वक्तव्य:
पीढ़ीगत अंतर कई बार परिवार और समाज में विवाद का कारण बनता है। युवा पुराने विचारों को अनुपयोगी मान लेते हैं, जबकि वृद्ध नई जीवन-शैली और तकनीक को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते। इससे संवाद की कमी और आपसी दूरी बढ़ती है।
यदि दोनों पीढ़ियाँ केवल अपने विचारों को सही मानेंगी, तो मतभेद गहरे होंगे। इसलिए आवश्यक है कि युवा परंपराओं का सम्मान करें और वृद्ध भी समय के साथ होने वाले बदलावों को समझें।
निष्कर्ष:
युवा पीढ़ी की नवीन सोच और वृद्ध पीढ़ी का अनुभव दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। आपसी सम्मान, धैर्य और संवाद द्वारा पीढ़ीगत अंतर को कम किया जा सकता है। समाज का विकास तभी संभव है जब दोनों पीढ़ियाँ एक-दूसरे का सहयोग करें।
धन्यवाद।
भाषा संगम
“निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।”
नीचे ‘निबंध’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
निबंध (हिंदी); निबंध: (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); ); मजमून (कश्मीरी ); मज्मूनु, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध – रचना (असमिया ) ; निबंध, वाड्ङ् (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कटटुरै (तमिल); उपन्यासम् (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)।
इनके अतिरिक्त यदि आप ‘निबंध’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर:
‘निबंध’ शब्द का कुछ विदेशी भाषाओं में प्रयोग:
अंग्रेजी – Essay
फ्रेंच – Essai
स्पेनिश – Ensayo
रूसी – Эссе
जापानी – エッセイ
चीनी – 作文
“निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।” वाक्य का पंजाबी अनुवाद:
ਨਿਬੰਧ ਲਿਖਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਉਸ ਦੀ ਰੂਪ-ਰੇਖਾ ਬਣਾ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ।
झरोखे से
पाठ में आदर्श निबंध लेखन के विषय में विस्तार से बताया गया है। अब आप सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?” पढ़िए—
उत्तर: यह पठन और चिंतन पर आधारित गतिविधि है। ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ लेख में अज्ञेय बताते हैं कि लेखक अपनी आंतरिक प्रेरणा, अनुभूतियों और मानसिक विवशता को समझने तथा उनसे मुक्त होने के लिए लिखता है।
उनके अनुसार वास्तविक रचना भीतर से उत्पन्न होती है। कभी-कभी संपादक, प्रकाशक या आर्थिक आवश्यकताएँ भी लेखक को लिखने के लिए प्रेरित करती हैं, लेकिन एक सच्चा रचनाकार यह पहचानता है कि कौन-सी रचना उसकी आंतरिक प्रेरणा से निकली है और कौन-सा लेखन बाहरी दबाव के कारण किया गया है।
यह लेख विद्यार्थियों को लेखन के उद्देश्य, रचनात्मक प्रेरणा और लेखक की ईमानदारी पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
खोजबीन
पाठ में आए साहित्यकारों बाणभट्ट श्रीहर्ष, अमीर खुसरो, सेनापति, महात्मा गांधी, ए. जी. गार्डिनर, शेक्सपीयर, मानटेन के विषय में पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर:
बाणभट्ट
बाणभट्ट सातवीं शताब्दी के प्रसिद्ध संस्कृत गद्यकार और कवि थे। वे सम्राट हर्षवर्धन के राजकवि थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ ‘हर्षचरित’ और ‘कादंबरी’ हैं। उनकी भाषा अलंकारपूर्ण और वर्णनात्मक थी।
श्रीहर्ष
श्रीहर्ष बारहवीं शताब्दी के प्रसिद्ध संस्कृत कवि और दार्शनिक थे। उनकी प्रसिद्ध काव्य-रचना ‘नैषधीयचरित’ है। दर्शन के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण रचना ‘खंडनखण्डखाद्य’ मानी जाती है। उनकी शैली विद्वत्तापूर्ण और अलंकारयुक्त थी।
अमीर खुसरो
अमीर खुसरो प्रसिद्ध सूफी कवि, संगीतकार और साहित्यकार थे। उन्होंने फारसी तथा हिंदवी में रचनाएँ कीं। उनकी पहेलियाँ, मुकरियाँ और लोक-रचनाएँ आज भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने भारतीय संगीत और भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सेनापति
सेनापति सत्रहवीं शताब्दी के प्रमुख ब्रजभाषा कवि थे। वे भक्ति और रीतिकाल के संधिकाल से संबंधित माने जाते हैं। उनकी रचनाओं में प्रकृति का सुंदर और प्रभावशाली चित्रण मिलता है। उनका प्रसिद्ध ग्रंथ ‘कवित्त रत्नाकर’ है।
महात्मा गांधी
महात्मा गांधी स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ प्रभावशाली लेखक, पत्रकार और विचारक भी थे। उन्होंने सत्य, अहिंसा, स्वदेशी और सामाजिक समानता का संदेश दिया। ‘यंग इंडिया’, ‘नवजीवन’ और ‘हरिजन’ जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से उन्होंने लोगों को जागरूक किया। उनकी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ प्रसिद्ध है।
ए. जी. गार्डिनर
ए. जी. गार्डिनर बीसवीं शताब्दी के प्रसिद्ध अंग्रेज निबंधकार और पत्रकार थे। वे सरल, सहज और मानवीय शैली में लिखते थे। उन्होंने सामान्य जीवन की छोटी घटनाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण सामाजिक और नैतिक विचार प्रस्तुत किए। वे ‘अल्फा ऑफ द प्लाउ’ नाम से भी लेख लिखा करते थे।
शेक्सपीयर
विलियम शेक्सपीयर अंग्रेजी साहित्य के महान नाटककार और कवि थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘हैमलेट’, ‘मैकबेथ’, ‘रोमियो एंड जूलियट’, ‘ओथेलो’ और ‘द मर्चेंट ऑफ वेनिस’ शामिल हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम, महत्वाकांक्षा, संघर्ष, ईर्ष्या और मानवीय स्वभाव का गहरा चित्रण मिलता है।
मानटेन
मिशेल द मॉन्तेन फ्रांस के प्रसिद्ध निबंधकार थे। उन्हें आधुनिक निबंध-विधा का जनक माना जाता है। उन्होंने अपने अनुभवों, विचारों, आदतों और जीवन के छोटे-बड़े प्रसंगों को सरल और स्वाभाविक शैली में लिखा। उनके निबंधों में आत्मचिंतन और स्वतंत्र विचारों की प्रधानता दिखाई देती है।
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