Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 संवादहीन NCERT Solutions - FREE PDF Download
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Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 NCERT Questions with Detailed Answers
अभ्यास (पृष्ठ 52-60)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1. कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
(क) परोपकार और त्याग
(ख) ममता और स्नेह
(ग) करुणा और क्रोध
(घ) जिज्ञासा और सहायता
उत्तर: (ख) ममता और स्नेह
तर्क: ताई विशाल घर में अकेली रहती थीं और मिट्टू उनका एकमात्र साथी था। वे उसे केवल पालतू पक्षी नहीं, बल्कि अपने बच्चे की तरह मानती थीं। उसकी देखभाल करना, उसके लिए भोजन बनाना और उससे बातें करना उनके गहरे स्नेह और ममता को प्रकट करता है।
प्रश्न 2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
(क) अनुशासन और परंपरा
(ख) उदासीनता और असावधानी
(ग) आत्मगौरव और विद्रोह
(घ) करुणा और नैतिकता
उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता
तर्क: जगन मास्टर किसी भी जीव को पिंजरे में बंद रखना अनुचित मानते थे। मिट्टू को बाहर निकालने का उनका निर्णय जीवों के प्रति करुणा, स्वतंत्रता के सम्मान और उनके नैतिक विचारों को दर्शाता है।
प्रश्न 3. मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
(क) भोजन की खोज
(ख) प्रेम की आकांक्षा
(ग) स्वतंत्रता की चाह
(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह
तर्क: पक्षियों का स्वाभाविक जीवन खुले आकाश में उड़ना है। पिंजरे में भोजन और सुरक्षा मिलने के बाद भी अवसर मिलते ही मिट्टू उड़ गया। इससे स्पष्ट होता है कि प्रत्येक जीव के लिए सुख-सुविधाओं से अधिक महत्त्वपूर्ण उसकी स्वतंत्रता होती है।
प्रश्न 4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद
उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
तर्क: ताई के पास बड़ा घर और आवश्यक साधन थे, पर उनके परिवार के सदस्य उनके साथ नहीं रहते थे। उनसे बातचीत करने और उनके सुख-दुख बाँटने वाला कोई नहीं था। इसी संवादहीनता और अकेलेपन ने उनके जीवन को दुखमय बना दिया था।
प्रश्न 5. कहानी में मानव समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
(क) मजबूरी
(ख) कर्मपरायणता
(ग) अकेलापन
(घ) संवादधर्मिता
उत्तर: (ग) अकेलापन
तर्क: कहानी आधुनिक समाज में बढ़ते बुजुर्गों के अकेलेपन को सामने लाती है। परिवार होते हुए भी ताई भावनात्मक रूप से अकेली थीं। उनका एक पक्षी पर निर्भर हो जाना बताता है कि अपनों से संवाद न होने पर व्यक्ति भीतर से कितना असहाय हो सकता है।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
उत्तर: यहाँ ‘नैया’ ताई के शेष जीवन का प्रतीक है। पति के निधन के बाद उनके बेटे शहर में जाकर बस गए और बेटियाँ विवाह के बाद अपने-अपने घर चली गईं। वृद्धावस्था में ताई एक बड़े, सूने घर में अकेली रह गई थीं। वे सोचती थीं कि बिना किसी अपने के उनके जीवन के बाकी दिन कैसे कटेंगे। इसी चिंता और अकेलेपन के कारण वे भगवान से पूछती हैं कि उनके जीवन की नैया कैसे पार लगेगी।
प्रश्न 2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर: यह वाक्य ताई के परिवार, संपत्ति और अधिकारों में आए बदलाव की ओर संकेत करता है। पहले घर, खेती और घरेलू व्यवस्था पर उनका प्रभाव था। समय बीतने के साथ पति का निधन हो गया, बच्चे उनसे दूर हो गए और घर के कार्य तथा संपत्ति का प्रबंध दूसरे लोगों के हाथों में चला गया। इस प्रकार ताई अपने ही घर में अधिकार और अपनापन दोनों खोती चली गईं।
प्रश्न 3. “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?
उत्तर: ताई के बच्चे और नाती-पोते उनके पास नहीं रहते थे। उनके भीतर बहुत स्नेह और ममता थी, लेकिन उसे व्यक्त करने के लिए कोई अपना नहीं था। मिट्टू के आने से उन्हें एक साथी मिल गया। उसकी चहचहाहट और छोटी-छोटी गतिविधियों ने ताई के सूने जीवन में खुशी भर दी। इसलिए उन्होंने अपनी सारी ममता मिट्टू पर न्योछावर कर दी।
प्रश्न 4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चे तैयार हो गई हैं। और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
उत्तर: मिट्टू के आने के बाद ताई के जीवन में उत्साह और सक्रियता लौट आई। पहले वे अपने भोजन और दिनचर्या के प्रति भी उदासीन रहती थीं, पर अब वे मिट्टू की पसंद और आवश्यकताओं का ध्यान रखने लगीं। उसके लिए मिर्च और अमरूद खोजने के कारण उनका संपर्क आसपास के लोगों, खेतों और पेड़ों से बढ़ा। इससे पता चलता है कि प्रेम और जिम्मेदारी ने उन्हें फिर से जीवन में रुचि लेना सिखाया।
प्रश्न 5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जगन मास्टर आदर्शवादी, संवेदनशील और जीवों की स्वतंत्रता का सम्मान करने वाले व्यक्ति थे। वे किसी पक्षी को पिंजरे में बंद रखना गलत समझते थे, इसलिए उन्होंने मिट्टू को बाहर निकाल दिया। मिट्टू के उड़ जाने पर उन्हें अपनी भूल का गहरा पछतावा हुआ। ताई को दुख से बचाने के लिए उन्होंने वैसा ही दूसरा तोता खोजने और उसे मिट्टू की तरह बोलना सिखाने का प्रयास किया। इससे उनकी करुणा, जिम्मेदारी और पड़ोसी के प्रति संवेदनशीलता का परिचय मिलता है।
प्रश्न 6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘संवादहीन’ शीर्षक ताई के जीवन के लिए सबसे अधिक सार्थक है। उनके अपने बच्चे उनसे दूर थे और परिवार के साथ उनका भावनात्मक संवाद लगभग समाप्त हो चुका था। मिट्टू ने कुछ समय के लिए उनके इस अकेलेपन को दूर किया। लेकिन उसके उड़ जाने के बाद नया तोता उनकी पुकार का उत्तर नहीं देता। इस प्रकार ताई फिर उसी मौन, अकेलेपन और संवादहीनता में लौट जाती हैं।
प्रश्न 7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
उत्तर: किसी घर की पहचान केवल उसकी दीवारों और आकार से नहीं, बल्कि उसमें रहने वाले लोगों की हँसी, बातचीत और अपनापन से होती है। ताई का घर बड़ा था, पर वहाँ परिवार की चहल-पहल नहीं थी। बच्चे दूर जा चुके थे और घर में केवल सन्नाटा था। इसलिए वह घर भौतिक रूप से सुरक्षित होते हुए भी भावनात्मक रूप से उजड़े हुए खंडहर जैसा प्रतीत होता था।
मेरे प्रश्न
नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
प्रश्न 1.
उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया।
प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न ख : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था?
उत्तर: (क) ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न 2.
उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था?
प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
उत्तर: (ख) ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
प्रश्न 3.
उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न ख : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे?
उत्तर: (क) गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न 4.
उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।
प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?
प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
उत्तर: (ख) शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
मेरे अनुभव मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर दीजिए-
प्रश्न 1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते- बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
उत्तर: जब हम किसी व्यक्ति, पशु या वस्तु से गहराई से जुड़े होते हैं, तो उससे दूर होने पर उसकी सुरक्षा की चिंता होना स्वाभाविक है। ताई के लिए मिट्टू उनके सूने जीवन का सबसे बड़ा सहारा था। इसलिए घर से बाहर जाते समय उन्हें डर रहता था कि कहीं वह भूखा न रह जाए, पिंजरा खुल न जाए या कोई उसे नुकसान न पहुँचा दे।
इसी प्रकार जब मैं अपने परिवार या पालतू पशु से दूर होता हूँ, तो मन में बार-बार उसकी कुशलता के विचार आते हैं। किसी काम में पूरी तरह ध्यान नहीं लग पाता और मन जल्दी घर लौटने को करता है। यह चिंता हमारे प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव को प्रकट करती है।
प्रश्न 2. “आखिर वह भी तो बोलता बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
उत्तर: हाँ, पशु-पक्षियों में भी प्रेम, दुख, भय, प्रसन्नता और अपनापन जैसी भावनाएँ होती हैं। वे मनुष्यों की भाषा नहीं बोलते, लेकिन हमारे स्वर, व्यवहार और स्पर्श को समझते हैं।
मेरे परिचित के पास एक पालतू कुत्ता है। जब उसका मालिक घर लौटता है, तो वह खुशी से पूँछ हिलाता हुआ उसके पास दौड़ता है। मालिक के दुखी होने पर वह चुपचाप उसके पास बैठ जाता है। इसी प्रकार कहानी में मिट्टू भी ताई की आवाज और भावनाओं को पहचानता था। इससे स्पष्ट है कि पशु-पक्षी भी संवेदनशील प्राणी होते हैं।
प्रश्न 3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत – शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर: ताई को कुछ समय के लिए भ्रम में रखने के पीछे गाँववालों और जगन मास्टर की भावना करुणापूर्ण थी। वे जानते थे कि मिट्टू के उड़ जाने की खबर ताई को गहरा सदमा दे सकती है। इसलिए उन्होंने दूसरा तोता लाकर उन्हें अचानक दुख से बचाने का प्रयास किया।
फिर भी लंबे समय तक किसी को सच्चाई से दूर रखना उचित नहीं है। बेहतर होता कि ताई को धीरे-धीरे और संवेदनशील तरीके से वास्तविकता बताई जाती तथा उनके अकेलेपन को दूर करने के लिए परिवार और पड़ोसी अधिक समय उनके साथ बिताते। इसलिए उनका उद्देश्य सही था, पर समाधान पूरी तरह उचित नहीं था।
प्रश्न 4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
उत्तर: एक बार मुझे पूरा विश्वास था कि मेरे जन्मदिन पर मुझे नई साइकिल मिलेगी। मैंने पहले ही तय कर लिया था कि शाम को दोस्तों के साथ उसे चलाने जाऊँगा। लेकिन उपहार खोलने पर उसमें पुस्तकों का एक सेट और घड़ी निकली।
पहले मुझे निराशा हुई, क्योंकि मेरी उम्मीद पूरी नहीं हुई थी। बाद में उन पुस्तकों को पढ़कर मुझे बहुत नई जानकारी मिली और घड़ी ने समय का सही उपयोग करना सिखाया। इस अनुभव से मैंने जाना कि जीवन में हर घटना हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होती, लेकिन कई बार अनपेक्षित चीजें भी हमारे लिए उपयोगी सिद्ध होती हैं।
प्रश्न 5. “ मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर: हाँ, लंबे समय तक बंद वातावरण में रहने के कारण कोई प्राणी पिंजरे या बंधन का आदी हो सकता है। नियमित भोजन और सुरक्षा मिलने से उसे बाहर की दुनिया अनजान और डरावनी लगने लगती है। धीरे-धीरे वह अपनी स्वाभाविक स्वतंत्रता और साहस भूल सकता है।
मैंने अपने पड़ोस में एक पालतू पक्षी देखा था। एक दिन उसका पिंजरा खुला रह गया, लेकिन वह बाहर उड़ने के बजाय दरवाजे पर ही बैठा रहा। उसे खुले आकाश की तुलना में पिंजरे की आदत अधिक हो चुकी थी। इसी प्रकार लंबे समय से बँधे पशु भी रस्सी खुलने पर तुरंत बाहर नहीं जाते। यह बताता है कि शारीरिक बंधन धीरे-धीरे मानसिक बंधन में बदल सकता है।
विधा से संवाद
कहानी का सौंदर्य
संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए-
विशेष बिंदु | अर्थ | उदाहरण |
चित्रात्मकता (दृश्य बिंब) | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना। | मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे। |
संवादात्मकता | कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। | “राम-राम कहो, सीताराम कहो।” |
पुनरुक्ति | शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता। | “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!” |
अतिशयोक्ति | किसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे। | रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है। |
लोकधर्मी भाषा | ग्रामीण, सहज, बोल-चाल की भाषा। | भगवान! कैसे नैया पार लगेगी? |
प्रश्नोत्तर शैली | पात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना। | मिट्ठू! अब कैसे कटेगी? |
उत्तर:
विशेष बिंदु | उदाहरण |
चित्रात्मकता | ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए जगन मास्टर एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक “आ मिट्टू आ!” पुकारते हुए पसीना-पसीना हो गए। |
संवादात्मकता | ताई बोलीं—“जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ।” मिट्टू बोला—“खुश रहो! खुश रहो!” |
पुनरुक्ति | “सीताराम! सीताराम!” |
अतिशयोक्ति | “जगन मास्टर के घर में महाकुंभ हो गया।” |
लोकधर्मी भाषा | “मेरी जान खाने को आ गया, मर जा…।” |
प्रश्नोत्तर शैली | “भगवान! नैया कैसे पार लगेगी?” |
कहानी का अंत
किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे-
सुखांत – जब कहानी का अंत प्रसन्नता, सफलता से होता है।
दुखांत – जब कथा का अंत दुख, वियोग, मृत्यु या हानि से होता है।
मुक्त अंत – जब कहानी स्पष्ट रूप से खत्म नहीं होती, बल्कि सोचने के लिए छोड़ दी जाती है।
अप्रत्याशित अंत – जब अंत अचानक और अप्रत्याशित रूप से सामने आता है।
यथार्थवादी अंत – जब कहानी का अंत जीवन की सच्चाई जैसा लगे।
प्रेरणात्मक अंत – जब कहानी के अंत में कोई प्रेरणा या सकारात्मक सोच दी जाए।
व्यंग्यात्मक अंत- जब कहानी का अंत व्यंग्य या कटाक्ष से किसी सत्य को प्रकट करता है।
आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
उत्तर: ‘संवादहीन’ कहानी का अंत मुख्य रूप से दुखांत और यथार्थवादी है। ताई बड़े उत्साह से मिट्टू के पास लौटती हैं, लेकिन नया तोता उनकी बातों का उत्तर नहीं देता। इससे उनके जीवन में फिर से वही मौन और अकेलापन लौट आता है। यह अंत बुजुर्गों की भावनात्मक उपेक्षा और संवाद की कमी की वास्तविक समस्या को उजागर करता है।
कहानी का नया अंत:
एक शाम ताई उदास बैठी नए तोते को पुकार रही थीं। तभी आँगन में पंखों की आवाज सुनाई दी। उन्होंने देखा कि उनका पुराना मिट्टू खिड़की पर बैठा था। ताई को देखते ही उसने कहा—“राम-राम! सीताराम!”
ताई की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। जगन मास्टर और गाँववाले भी वहाँ पहुँच गए। इसके बाद उन्होंने मिट्टू को पिंजरे में बंद न रखने का निर्णय लिया। मिट्टू प्रतिदिन खुले आकाश में उड़ता और शाम को ताई के पास लौट आता। इस प्रकार ताई को उसका साथ मिला और मिट्टू को स्वतंत्रता।
विषयों से संवाद
प्रश्न 1. “अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।”
कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं ‘मास्टराइन’, तो कहीं ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?
उत्तर: कहानी का परिवेश ग्रामीण और पारंपरिक है। पुराने समय में महिलाओं को प्रायः उनके पति के नाम, पेशे या संबंध के आधार पर पुकारा जाता था। इसलिए उन्हें ‘मास्टराइन’ या ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है।
इसके अतिरिक्त कहानी का मुख्य केंद्र ताई और मिट्टू का संबंध है। जगन मास्टर की पत्नी एक सहायक पात्र हैं, इसलिए लेखक ने उनके व्यक्तिगत नाम के स्थान पर उनके सामाजिक संबंध का प्रयोग किया है। यह उस समय की सामाजिक व्यवस्था को भी सामने लाता है, जिसमें महिलाओं की स्वतंत्र पहचान को कम महत्त्व दिया जाता था।
प्रश्न 2. “गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे”
(क) ‘कुंभ – स्नान’ एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए-
इसका आयोजन क्यों किया जाता है?
पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था?
अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?
उत्तर: कुंभ मेला भारत का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन से निकले अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नाशिक में गिरी थीं। इसी कारण इन स्थानों पर निश्चित धार्मिक और खगोलीय संयोगों के अनुसार कुंभ आयोजित किया जाता है।
श्रद्धालु मानते हैं कि इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने से मन की शुद्धि होती है और आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि साधु-संतों, विभिन्न परंपराओं और भारतीय संस्कृति के विशाल संगम का भी प्रतीक है।
पिछला आयोजन: महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक प्रयागराज में आयोजित हुआ था।
अगला आयोजन: आगामी सिंहस्थ कुंभ 2027 में नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होगा।
(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।
(संकेत – कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट, यात्रा के साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि।)
उत्तर: ताई ने कुंभ यात्रा से कई दिन पहले तैयारी आरंभ कर दी होगी। उन्होंने कपड़े, पूजा की सामग्री, दवाइयाँ, पानी की बोतल और रास्ते के लिए घर का बना भोजन एक थैले में रखा होगा। मिट्टू की देखभाल की जिम्मेदारी पड़ोसियों को समझाकर वे मोहल्ले के अन्य श्रद्धालुओं के साथ स्टेशन पहुँची होंगी।
उन्होंने अपने गाँव या निकटतम शहर से प्रयागराज तक रेल का आरक्षित टिकट लिया होगा। यात्रा के दौरान उनके साथी भजन गाते और कुंभ के अनुभवों पर चर्चा करते होंगे। प्रयागराज पहुँचकर वे किसी धर्मशाला या अस्थायी शिविर में रुकी होंगी।
सुबह वे साथियों के साथ त्रिवेणी संगम पहुँची होंगी और स्नान तथा पूजा की होगी। यात्रा के दौरान उन्होंने सादा भोजन किया होगा। धार्मिक उत्साह के बीच भी उन्हें बार-बार मिट्टू की चिंता आती होगी और वे जल्दी घर लौटने की इच्छा करती होंगी।
(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव
या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे?
(संकेत – उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों-देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)
उत्तर: हमारे नगर में हर वर्ष दीपावली के अवसर पर एक बड़ा मेला लगाया जाता है। पूरा मैदान रंग-बिरंगी रोशनियों, झंडियों और सजी हुई दुकानों से चमक उठता है। दूर-दूर तक लोगों की भीड़ दिखाई देती है। बच्चों के झूले, खिलौने और सजावटी वस्तुएँ सभी का ध्यान आकर्षित करती हैं।
सुनने पर चारों ओर ढोल, भजन, दुकानदारों की आवाजें और बच्चों की हँसी सुनाई देती है। खाने की दुकानों से गरम जलेबी, समोसे, पकौड़े और मसालों की स्वादिष्ट सुगंध आती है।
मेले में मिट्टी के दीयों की सोंधी महक और फूलों की खुशबू वातावरण को विशेष बनाती है। चमकीले खिलौनों और मिट्टी की वस्तुओं को छूने का अनुभव भी आनंद देता है। जलेबी, चाट और मिठाइयों का स्वाद मेले की खुशी को और बढ़ा देता है।
श्रद्धालु मंदिर में दीप जलाते और प्रार्थना करते हैं। मेले का पूरा वातावरण उत्साह, आस्था, रंग और सामूहिक आनंद से भरा होता है।
सृजन
प्रश्न 1. “बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।”
अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा ? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?
उत्तर: ताई के बहू-बेटों ने बेहतर रोजगार, बच्चों की अच्छी शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं की इच्छा से गाँव छोड़ा होगा। शहर में अधिक अवसर मिलने की आशा ने उन्हें वहाँ बसने के लिए प्रेरित किया होगा।
गाँव छोड़ते समय उनके मन में उत्साह और दुख दोनों रहे होंगे। एक ओर वे अपने भविष्य को बेहतर बनाने के सपने देख रहे होंगे, तो दूसरी ओर ताई, अपने पुश्तैनी घर, खेतों और बचपन की यादों से दूर जाने का दुख भी अनुभव कर रहे होंगे। संभव है कि उन्होंने सोचा हो कि शहर में व्यवस्थित होने के बाद ताई को भी अपने पास बुला लेंगे।
नए स्थान पर बसने के लिए उन्होंने आवश्यक सामान, दस्तावेज और धन की व्यवस्था की होगी। साथ ही स्वयं को शहर के नए वातावरण, जीवनशैली और चुनौतियों के अनुकूल बनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया होगा।
प्रश्न 2. “वहाँ बैठे एवजी मिट्टू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की”
ताई सोच रही थीं कि मिट्टू ‘राम राम सीताराम’ कहेगा, लेकिन एवजी मिट्टू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्टू वापस आ गया। मिट्टू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए।
(संकेत – प्रारंभ कीजिए- “एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके …”)
उत्तर: एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके और अचानक “राम-राम, सीताराम!” की परिचित आवाज हवेली में गूँज उठी। ताई ने ऊपर देखा तो उनका असली मिट्टू उड़ता हुआ आया और सीधे उनके कंधे पर बैठ गया।
अपने पिंजरे में दूसरे तोते को देखकर मिट्टू कुछ देर चुप रहा। फिर उसने तिरछी नजर से उसकी ओर देखा और बोला, “भाई, तुम इतने चुप क्यों हो? इस घर में ताई को केवल किसी पक्षी की नहीं, बल्कि बात करने वाले साथी की आवश्यकता है।”
नया तोता उसकी बात सुनकर हैरान हुआ। ताई ने असली मिट्टू को प्यार से सहलाया और उनकी आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे। कुछ दिनों में नया तोता भी असली मिट्टू से “राम-राम” और “सीताराम” बोलना सीख गया। अब ताई के सूने घर में दोनों तोतों की आवाजें गूँजने लगीं और उनकी संवादहीन दुनिया फिर से जीवंत हो उठी।
प्रश्न 3. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।”
आप घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए – “आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि”। उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: आज मैंने अपने दादाजी से उनके बचपन के विषय में बातचीत की। उन्होंने बताया कि जब वे मेरी आयु के थे, तब मोबाइल फोन, इंटरनेट और टेलीविजन जैसी सुविधाएँ नहीं थीं। वे विद्यालय से लौटने के बाद खेतों में परिवार की सहायता करते थे। खाली समय में मित्रों के साथ कबड्डी, खो-खो, गिल्ली-डंडा और अन्य खेल खेलते थे।
शाम के समय गाँव के लोग बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे इकट्ठे होते थे। बड़े-बुजुर्ग बच्चों को लोककथाएँ, वीरों की कहानियाँ और अपने अनुभव सुनाते थे। त्योहारों और पारिवारिक कार्यों में पूरा गाँव मिल-जुलकर भाग लेता था।
दादाजी ने बताया कि उस समय लोगों के पास एक-दूसरे के लिए अधिक समय था। यदि गाँव में कोई बुजुर्ग या अकेला व्यक्ति होता, तो पड़ोसी उसकी देखभाल करते थे। आपसी बातचीत और सहयोग के कारण लोग कम अकेलापन महसूस करते थे।
प्रश्न 4. “मिट्टू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!”
मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्टू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।
(संकेत : आप समाचार पत्रों में प्रकाशित खोया-पाया या तलाश संबंधी विज्ञापन देख सकते हैं।)
उत्तर:
खोया हुआ तोता
एक प्यारा हरे रंग का पहाड़ी तोता, जिसका नाम “मिट्टू” है, दिनांक 10 अप्रैल 2026 को शाम लगभग चार बजे घर से उड़ गया है।
पहचान:
नाम – मिट्टू
रंग – हरा
चोंच – लाल
विशेषता – “राम-राम” और “सीताराम” बोलता है।
जिस किसी व्यक्ति को मिट्टू दिखाई दे या उसके बारे में कोई जानकारी मिले, वह कृपया नीचे दिए गए पते या संपर्क नंबर पर सूचना दें।
पता:
मकान संख्या 560,
लाजपत नगर, नई दिल्ली
संपर्क नंबर: XXXXXXXXXX
सही सूचना देने वाले व्यक्ति को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
‘मिट्टू’ शब्द का अर्थ होता है- मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता।
यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है- ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ जिसका अर्थ है ‘अपनी प्रशंसा आप करना’ या ‘अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना’।
आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है-
“अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
उत्तर: जीव-जंतुओं से संबंधित कुछ मुहावरे, उनके अर्थ और वाक्य-प्रयोग इस प्रकार हैं—
1. कोल्हू का बैल होना
अर्थ – लगातार कठिन परिश्रम करते रहना।
वाक्य – परीक्षा के दिनों में अमित सुबह से रात तक कोल्हू के बैल की तरह पढ़ाई करता रहा।
2. ऊँट के मुँह में जीरा
अर्थ – आवश्यकता की तुलना में बहुत कम मात्रा होना।
वाक्य – इतने बड़े परिवार के लिए दो किलो चावल ऊँट के मुँह में जीरे के समान हैं।
3. भीगी बिल्ली बनना
अर्थ – डरकर चुप या विनम्र हो जाना।
वाक्य – प्रधानाचार्य को देखते ही शरारती विद्यार्थी भीगी बिल्ली बन गया।
4. गधे को बाप बनाना
अर्थ – अपना काम निकालने के लिए किसी की अनुचित खुशामद करना।
वाक्य – कुछ लोग अपना काम पूरा कराने के लिए गधे को भी बाप बना लेते हैं।
5. मगरमच्छ के आँसू बहाना
अर्थ – झूठा या दिखावटी दुख प्रकट करना।
वाक्य – अपनी गलती छिपाने के लिए वह सबके सामने मगरमच्छ के आँसू बहाने लगा।
6. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
अर्थ – अयोग्य व्यक्ति अच्छी वस्तु या गुण का महत्त्व नहीं समझता।
वाक्य – उसे शास्त्रीय संगीत बिल्कुल पसंद नहीं आया; सच है, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
7. साँप सूँघ जाना
अर्थ – डर या आश्चर्य के कारण अचानक चुप हो जाना।
वाक्य – शिक्षक के प्रश्न पूछते ही पूरी कक्षा को साँप सूँघ गया।
8. बंदर बाँट करना
अर्थ – वस्तुओं का अन्यायपूर्ण या बेईमानी से बँटवारा करना।
वाक्य – साझेदारों ने लाभ का बंदर बाँट करके छोटे कर्मचारियों को कुछ भी नहीं दिया।
9. कलेजे पर साँप लोटना
अर्थ – किसी की सफलता देखकर बहुत ईर्ष्या होना।
वाक्य – पड़ोसी की तरक्की देखकर उसके विरोधियों के कलेजे पर साँप लोटने लगा।
ध्वन्यात्मकता शब्दों से
“जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीतारहस्य’ से हटकर मिट्टू के पंखों की ‘फड़फड़ाहट’ पर गया।”
पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि ‘फड़फड़ाहट’ कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर: ध्वनि का आभास कराने वाले कुछ शब्द और उनके वाक्य इस प्रकार हैं—
चहचहाहट – सुबह पक्षियों की चहचहाहट से पूरा बगीचा जीवंत हो उठा।
भिनभिनाहट – मिठाई के पास मक्खियों की भिनभिनाहट सुनाई दे रही थी।
गड़गड़ाहट – बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनकर बच्चे घर के अंदर चले गए।
सरसराहट – रात में सूखे पत्तों की सरसराहट स्पष्ट सुनाई दे रही थी।
खड़खड़ाहट – तेज हवा से खिड़कियों की खड़खड़ाहट होने लगी।
छनछनाहट – नृत्य करते समय उसके घुँघरुओं की छनछनाहट पूरे सभागार में फैल गई।
शब्द-युग्म
“अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।”
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द-युग्म हैं। वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं-
पुनरुक्त शब्द-युग्म, जैसे- बार-बार
सजातीय शब्द-युग्म, जैसे- उठना-बैठना
समानार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-प्रतिदिन
विपरीतार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-रात
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए-
उत्तर:
1. वक्त-बेवक्त
अर्थ – उचित या अनुचित समय पर, कभी भी।
वाक्य – ताई वक्त-बेवक्त मिट्टू को पुकारती रहती थीं।
2. नियम-सिद्धांत
अर्थ – निर्धारित नियम और नैतिक मान्यताएँ।
वाक्य – जगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांतों से समझौता नहीं करते थे।
3. शादी-ब्याह
अर्थ – विवाह और उससे जुड़े समारोह।
वाक्य – गाँव में शादी-ब्याह के अवसर पर सभी लोग मिलकर काम करते हैं।
4. तीज-त्योहार
अर्थ – धार्मिक और सामाजिक पर्व।
वाक्य – हमारे परिवार में तीज-त्योहार बड़े उत्साह और प्रेम से मनाए जाते हैं।
5. चौका-चूल्हा
अर्थ – भोजन बनाने और रसोई से संबंधित कार्य।
वाक्य – दादी सुबह जल्दी उठकर चौका-चूल्हा संभालती थीं।
6. खेती-बाड़ी
अर्थ – खेत और कृषि से जुड़े कार्य।
वाक्य – गाँव के अधिकांश लोग खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं।
खोजबीन शब्दों की
“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्टू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”
उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए-
ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विपरीतार्थक है।
ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है।
ऐसा शब्द जो एक क्रिया है।
ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है।
ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है।
ऐसा शब्द जो एक विशेषण है।
ऐसा शब्द जो एक कारक है।
ऐसा शब्द जो एक कर्ता है।
उत्तर:
‘तंग’ का विपरीतार्थक शब्द – ढीली
मुहावरा – पसीना-पसीना होना
क्रिया – सँभालते, पुकारते, तौलने
संज्ञा – मिट्टू, बाग, पेड़, डाल, पंख
सर्वनाम – वह
विशेषण – ढीली, दूसरा
कारक – हाथों से, बाग में, पेड़ के पास
कर्ता – वह अर्थात जगन मास्टर तथा मिट्टू
अर्थ के आधार पर वाक्य
आप जानते ही हैं कि अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे- विधानवाचक निषेधवाचक प्रश्नवाचक, विस्मया. दिबोधक, आज्ञावाचक ( विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक।
क्र. सं. | वाक्य का भेद | अर्थ/उपयोग | उदाहरण |
1. | विधानवाचक वाक्य | किसी घटना या स्थिति के बारे में कथन करने वाला वाक्य। | जगन मास्टर ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया। |
2. | निषेधवाचक वाक्य | किसी कार्य के न होने या मना करने का भाव व्यक्त करने वाला वाक्य। | मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की। |
3. | प्रश्नवाचक वाक्य | किसी बात को पूछने या जानने के लिए प्रयुक्त वाक्य। | मिट्ठू! अब कैसे कटेगी? |
4. | विस्मयादिबोधक वाक्य | आश्चर्य, प्रसन्नता या दुख प्रकट करने वाला वाक्य। | मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!! |
5. | आज्ञावाचक वाक्य | किसी को कुछ करने का आदेश या आग्रह व्यक्त करने वाला वाक्य। | राम-राम कहो, सीताराम कहो। |
6. | इच्छावाचक वाक्य | किसी आकांक्षा, आशा या इच्छा को प्रकट करने वाला वाक्य। | जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ! |
7. | संदेहवाचक वाक्य | किसी बात को लेकर शंका या अनिश्चितता प्रकट करने वाला वाक्य। | ताई के सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा। |
8. | संकेतवाचक वाक्य | इसमें एक बात या कार्य का होना या न होना किसी दूसरी बात या कार्य के होने या न होने पर निर्भर होता है। | जब खेती-बाड़ी नहीं, कारोबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते! |
अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।
उत्तर:
विधानवाचक वाक्य:
“ताई जिस घर में रहती थीं, वह एक विशाल हवेली थी।”
यह वाक्य सामान्य जानकारी या कथन प्रस्तुत करता है।
निषेधवाचक वाक्य:
“मिट्टू ने बाहर आने की कोई इच्छा प्रकट नहीं की।”
इस वाक्य में कार्य के न होने का भाव है।
प्रश्नवाचक वाक्य:
“भगवान! नैया कैसे पार लगेगी?”
इस वाक्य में प्रश्न पूछने का भाव है।
विस्मयादिबोधक वाक्य:
“अरे! यह मिट्टू तो एकदम बदल गया है!”
इसमें आश्चर्य का भाव प्रकट किया गया है।
आज्ञावाचक वाक्य:
“राम-राम कहो, सीताराम कहो।”
इसमें आदेश या आग्रह का भाव है।
इच्छावाचक वाक्य:
“जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ!”
इसमें शुभकामना और इच्छा प्रकट की गई है।
संदेहवाचक वाक्य:
“शायद ताई को नए तोते और पुराने मिट्टू का अंतर समझ में आ गया था।”
इस वाक्य में संभावना और संदेह का भाव है।
संकेतवाचक वाक्य:
“यदि जगन मास्टर रोशनदान खुला न छोड़ते, तो मिट्टू बाहर न उड़ता।”
इस वाक्य में एक कार्य का होना दूसरी शर्त पर निर्भर है।
गतिविधियाँ
नीचे दी गई गतिविधियाँ अपने समूह के साथ मिलकर कीजिए-
प्रश्न 1. कहानी के रंग
समूहों को अलग-अलग भावनाएँ (दुख, स्नेह, आजादी) दीजिए और इसे मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: यह गतिविधि विद्यार्थी समूह बनाकर स्वयं करेंगे। मूक अभिनय में बिना कुछ बोले चेहरे के भाव और शरीर की मुद्राओं से भावनाएँ प्रस्तुत की जाती हैं।
दुख – सिर और कंधे झुकाकर, उदास चेहरा बनाकर तथा आँखों में निराशा दिखाकर।
स्नेह – मुस्कान, प्यार से हाथ फेरने, गले लगाने या किसी की देखभाल करने के हाव-भाव से।
आजादी – बाहें फैलाकर, प्रसन्नता से उछलकर और खुले आकाश में उड़ने जैसे हाव-भाव से।
प्रश्न 2. पंखों की योजना
छोटे समूहों में सोचें कि अगर आपको मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो आप कहाँ जाते और क्यों?
उत्तर: यदि मुझे मिट्टू की तरह उड़ने का अवसर मिलता, तो मैं सबसे पहले हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों के ऊपर उड़ता। वहाँ से नदियों, जंगलों और घाटियों का सुंदर दृश्य देखता।
इसके बाद मैं समुद्र के ऊपर उड़कर दूर-दूर तक फैले नीले जल को देखता। मैं विभिन्न देशों और स्थानों की यात्रा करता, क्योंकि उड़ते समय न सड़कों की बाधा होती और न सीमाओं की रोक।
मैं ऐसे स्थानों पर जाना पसंद करता जहाँ प्रकृति शांत और प्रदूषण से मुक्त हो। खुले आकाश में उड़ने से मुझे स्वतंत्रता, रोमांच और दुनिया को नए रूप में देखने का अनुभव मिलता।
प्रश्न 3. “पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही”
यह वाक्य बताता है कि ताई ने भोजन संबंधी अपनी आवश्यकताओं पर कभी ध्यान नहीं दिया अथवा उन्हें महत्वपूर्ण नहीं माना। हमारे परिवेश में ऐसी बहुत-सी महिलाएँ हैं जो परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं और अपनी आवश्यकताओं की अनदेखी करती हैं।
अपने घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों के विषय में जानिए और समझिए कि उनकी पसंद का भोजन माह में कब-कब बनता है।
उत्तर: मैंने अपने घर की माँ और दादी से उनकी भोजन संबंधी पसंद के बारे में पूछा। माँ को दक्षिण भारतीय भोजन, विशेष रूप से डोसा और इडली पसंद हैं, जबकि दादी को बाजरे की रोटी और सरसों का साग अच्छा लगता है।
मुझे पता चला कि माँ की पसंद का भोजन महीने में केवल एक या दो बार बनता है, क्योंकि वे प्रायः बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की पसंद के अनुसार खाना बनाती हैं। दादी की पसंद का भोजन भी विशेष अवसरों या सर्दियों में ही बनाया जाता है।
इस गतिविधि से मैंने समझा कि घर की महिलाएँ अपनी पसंद से पहले परिवार की आवश्यकताओं का ध्यान रखती हैं। इसलिए हमें भी समय-समय पर उनकी पसंद का भोजन बनवाना चाहिए और भोजन तैयार करने में उनकी सहायता करनी चाहिए।
मेरी पहेली
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
उत्तर:
1. तोता
हरा बदन और लाल है चोंच,
मीठी बोली मेरी पहचान।
“राम-राम” मैं बोलूँ दिनभर,
बताओ मेरा क्या है नाम?
उत्तर – तोता
2. ताई
बड़ा घर लेकिन रहती अकेली,
ममता जिसकी बहुत निराली।
मिट्टू से जो बातें करती,
बताओ वह कौन है प्यारी?
उत्तर – ताई
3. कुंभ
नदी किनारे लगता मेला,
साधु-संतों का बड़ा रेला।
करोड़ों श्रद्धालु स्नान को आते,
बताओ इसे क्या कहते?
उत्तर – कुंभ
4. पिंजरा
लोहे की जाली से बना,
पक्षी रहता मेरे भीतर।
दाना-पानी सब मिल जाता,
पर छिन जाता खुला आकाश।
उत्तर – पिंजरा
5. कमरा
चार दीवारें, एक दरवाजा,
खिड़की से आए प्रकाश।
जिसमें रहकर आराम करें,
बताओ मेरा नाम।
उत्तर – कमरा
6. गंगा
पर्वत से निकलती पावन धारा,
सबको करती निर्मल सारा।
हर-हर कहकर लोग नहाते,
कुंभ में मेरे तट पर आते।
संवादहीन कहानी का मुख्य संदेश (Main Message of Chapter 3 Samvaadheen)
संवादहीन कहानी आधुनिक समाज में बुजुर्गों के अकेलेपन और भावनात्मक उपेक्षा को उजागर करती है। बड़ा घर और सुविधाएँ होने के बाद भी ताई अपने परिवार से दूर, संवादहीन जीवन जीती हैं, और मिट्टू ही उनका एकमात्र सहारा बन जाता है। कहानी सिखाती है कि व्यक्ति को भौतिक साधनों से अधिक अपनों के साथ, बातचीत और स्नेह की आवश्यकता होती है। इन्हीं भावों पर आधारित प्रश्नों के लिए Vedantu के Chapter 3 NCERT Solutions का अभ्यास करें।
CBSE Class 9 Hindi Chapter 3 Samvaadheen Other Study Materials
S.No | Important Links for Chapter 3 Class 9 Hindi |
1 | Class 9 Samvaadheen Important Questions |
2 | Class 9 Samvaadheen Revision Notes |
Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga
Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.
S.No | NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF |
1 | Chapter 1 - Do Bailon Ki Katha Solutions |
2 | Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions |
3 | Chapter 4 - Aisi Bhi Baatein Hoti Hein Solutions |
4 | Chapter 5 - Aakhri Chataan Tak Solutions |
5 | Chapter 6 - Reedh Ki Haddi Solutions |
6 | Chapter 7 - Main Aur Mera Desh Solutions |
7 | Chapter 8 - Pad Solutions |
8 | Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions |
9 | Chapter 10 - Bharati Jay Vijaykare! Solutions |
10 | Chapter 11 - Jhansi Ki Rani Solutions |
11 | Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions |
Additional Study Materials for Class 9 Hindi
S.No | Important Study Material for Hindi Class 9 |
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FAQs on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 Samvaadheen (संवादहीन) 2026-27
1. संवादहीन कहानी किस विषय पर आधारित है?
संवादहीन कहानी आधुनिक समाज में बुजुर्गों के अकेलेपन और संवाद की कमी पर आधारित है। ताई अपने बड़े घर में अकेली रहती हैं और मिट्टू नामक तोता ही उनका साथी बनता है। कहानी परिवार से दूरी और बुजुर्गों की भावनात्मक उपेक्षा की वास्तविकता को मार्मिक ढंग से दर्शाती है।
2. संवादहीन कहानी का शीर्षक किसके लिए सबसे अधिक सार्थक है?
शीर्षक 'संवादहीन' ताई के जीवन के लिए सबसे अधिक सार्थक है। उनके बच्चे दूर रहते हैं और परिवार से उनका भावनात्मक संवाद समाप्त हो चुका है। मिट्टू कुछ समय उनका अकेलापन दूर करता है, पर उसके उड़ जाने और नए तोते के मौन रहने पर ताई फिर संवादहीनता में लौट जाती हैं।
3. What is the character sketch of Tai in NCERT Solutions for Chapter 3 संवादहीन?
Tai is a loving, affectionate, and patient elderly woman. Despite owning a large house and resources, she lives alone, far from her family. Her deep maternal affection pours onto the parrot Mittu. Sensitive yet inwardly lonely, she represents the neglected elderly in modern society.
4. What does Mittu flying away symbolise in the story from NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga?
Mittu flying away symbolises the longing for freedom. Even after getting food and safety in the cage, he flew off the moment he got the chance. This shows that for every living being, freedom matters more than comfort and security.
5. What kind of ending does the story संवादहीन have?
The story has a tragic and realistic ending. Tai returns eagerly to Mittu, but the new parrot does not respond to her, and the same silence and loneliness return to her life. This ending highlights the harsh reality of the emotional neglect of the elderly.
6. Where can I download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 संवादहीन PDF for free?
You can download the FREE PDF of NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 संवादहीन from Vedantu. The PDF includes detailed answers to all exercises - रचना से संवाद, विधा से संवाद, भाषा से संवाद, and सृजन — and can be used offline for revision anytime.
7. Are these NCERT Solutions for Chapter 3 संवादहीन free and based on the latest 2026-27 syllabus?
Yes. Vedantu's solutions are completely free and based on the new NCERT Ganga textbook and the latest CBSE 2026-27 syllabus. They cover all exercise question-answers, the literary features of the story (कहानी का सौंदर्य), grammar, and creative writing questions, prepared by expert Hindi teachers.



















